बिहार में बदली ग्रामीण तस्वीर, नीतीश सरकार की योजनाओं का दिखने लगा असर

Jyoti Sinha
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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार सरकार ने पिछले दो दशकों से ग्रामीण विकास पर लगातार फोकस किया है। 2005 में शुरू हुई यह पहल अब गांवों की सूरत और सीरत दोनों बदल रही है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका से जुड़ी योजनाओं ने ग्रामीण इलाकों को नई दिशा दी है।

अब तक राज्य में 1.3 लाख किलोमीटर से अधिक सड़कें और 1,153 बड़े पुल बन चुके हैं। इससे न केवल गांव-गांव की कनेक्टिविटी सुधरी, बल्कि 20 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार भी मिला।

ग्रामीण सड़कों से खुली तरक्की की राह
सरकार ने माना कि विकास का आधार सड़कें हैं। मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना और ग्रामीण संपर्क योजना के तहत 53 हजार किलोमीटर से ज्यादा नई सड़कें और हजार से अधिक पुल तैयार किए गए। इस साल ही 68 हजार किलोमीटर सड़कें पूरी हो चुकी हैं, जबकि 60 हजार किलोमीटर निर्माणाधीन हैं। 28 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश इन योजनाओं पर किया जा चुका है।

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इन सड़कों ने गांवों में आर्थिक गतिविधियों को गति दी। मजदूर और भूमिहीन परिवारों की आय बढ़ी और पलायन की दर 38 प्रतिशत से घटकर 16 प्रतिशत रह गई है।

महिलाओं की पहचान बनी ‘जीविका’
बिहार की ग्रामीण सफलता की सबसे बड़ी कहानी ‘जीविका’ योजना है। अब तक 11 लाख से ज्यादा स्वयं सहायता समूह बने हैं, जिनसे एक करोड़ से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। लगभग 30 प्रतिशत महिलाओं की आय पांच हजार रुपये से ऊपर पहुंच चुकी है।

सितंबर 2025 तक 20 लाख से ज्यादा महिलाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म से भी जुड़ चुकी हैं। आज 35% से ज्यादा गांवों में महिलाएं अपने नेतृत्व में छोटे कारोबार चला रही हैं।

नल-जल और कृषि योजनाओं का असर
राज्य की नल-जल योजना से 1.57 करोड़ परिवारों को शुद्ध पानी की सुविधा मिली। इससे ग्रामीण परिवारों की सेहत और जीवनशैली में सुधार हुआ है।

खेती-किसानी में भी बड़ा बदलाव दिख रहा है। 73 लाख किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ ले रहे हैं। इससे ग्रामीण परिवारों की आय में बचत और निवेश की गुंजाइश बढ़ी है।

गरीबी दर में गिरावट और अर्थव्यवस्था की मजबूती
2005 में जहां गरीबी दर 55% से ऊपर थी, वहीं अब यह घटकर 34% पर आ गई है। बिहार आर्थिक सर्वे 2024-25 के अनुसार, राज्य की जीडीपी वृद्धि दर 9.2% है, जो राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। इसमें सबसे बड़ा योगदान ग्रामीण बुनियादी ढांचे और महिला स्वावलंबन का है।

भविष्य की योजनाएं
ग्रामीण कार्य विभाग का लक्ष्य है कि आने वाले समय में 11 हजार नई सड़कें और 730 नए पुल बनाए जाएं। इसके लिए 21 हजार करोड़ से अधिक की परियोजनाएं मंज़ूर की गई हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि ये सड़कें सिर्फ रास्ते नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक बदलाव की धुरी हैं।

आज बिहार के गांव पिछड़ेपन की पहचान से निकलकर आत्मनिर्भरता और विकास की नई मिसाल बन रहे हैं। नीतीश कुमार का दावा है कि आने वाले वर्षों में ग्रामीण बिहार पूरे देश के लिए रोल मॉडल साबित होगा।

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