NEWSPR डेस्क। पटना बिहार में भूमि से जुड़े फर्जीवाड़े और भू-माफियाओं पर नकेल कसने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के निर्देश पर अब जमीन के मामलों में जाली दस्तावेज पेश करने वालों के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज होगी और उन्हें जेल जाना पड़ेगा। अब तक ऐसे मामलों में केवल आवेदन खारिज कर औपचारिकता निभा दी जाती थी, लेकिन नई व्यवस्था में आपराधिक कार्रवाई अनिवार्य कर दी गई है।
उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि दाखिल-खारिज, नामांतरण, सरकारी जमीन या किसी भी राजस्व संबंधी मामले में यदि कोई व्यक्ति फर्जी कागजात प्रस्तुत करता है, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा। अब जालसाजी पकड़ में आने पर सिर्फ फाइल बंद नहीं होगी, बल्कि दोषियों को कानून का सामना करना पड़ेगा।
नई व्यवस्था के तहत संबंधित अंचलाधिकारी (CO) को स्वयं स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज कराना अनिवार्य होगा। उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने साफ किया है कि यदि किसी अधिकारी ने इस प्रक्रिया में लापरवाही बरती या फर्जीवाड़े को नजरअंदाज किया, तो उसे गंभीर कदाचार माना जाएगा और संबंधित अधिकारी पर भी सख्त विभागीय कार्रवाई होगी।
डिप्टी सीएम के निर्देश के बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव गोपाल मीणा ने राज्य के सभी अंचलाधिकारियों को लिखित आदेश जारी कर दिया है। विभाग ने साफ किया है कि परिमार्जन प्लस, बंदोबस्ती, सीमांकन, भू-अर्जन और अन्य भूमि मामलों में जाली दस्तावेजों के जरिए प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश अब किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह अहम निर्णय उपमुख्यमंत्री द्वारा आयोजित ‘भूमि सुधार जन कल्याण संवाद’ के दौरान मिली शिकायतों के आधार पर लिया गया है। प्रमंडलीय मुख्यालयों में हुई जनसुनवाई में सामने आया कि भू-माफिया फर्जी कागजात के सहारे सरकारी और निजी जमीनों पर कब्जा करते रहे हैं और पकड़े जाने पर भी सख्त सजा से बच निकलते थे। सरकार के इस फैसले से भू-माफियाओं में हड़कंप मचा है और आम लोगों को भूमि विवादों से राहत मिलने की उम्मीद जगी है।