NEWSPR डेस्क। तमिलनाडु के महाबलीपुरम में निर्मित दुनिया का सबसे विशाल शिवलिंग लंबा सफर तय कर बिहार के गोपालगंज तक तो पहुंच गया है, लेकिन अब इसे अपने अंतिम गंतव्य पूर्वी चंपारण जिले तक ले जाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। भारी वजन और कमजोर पुल के कारण शिवलिंग का आगे परिवहन फिलहाल अटका हुआ है।
बताया जा रहा है कि यह शिवलिंग 33 फीट ऊंचा है और इसका वजन करीब 210 टन है। इसका निर्माण तमिलनाडु के महाबलीपुरम में किया गया है और इसे विशेष भारी-भरकम ट्रेलर के जरिए बिहार लाया जा रहा है। नए साल की शुरुआत में यह गोपालगंज के बलथरी चेकपोस्ट क्षेत्र में पहुंचा था। यहां से इसे पूर्वी चंपारण जिले के कैथवलिया में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर तक ले जाना है, जहां इसकी प्राण प्रतिष्ठा प्रस्तावित है।
विशाल शिवलिंग के गोपालगंज पहुंचते ही बलथरी चेकपोस्ट और कुचायकोट क्षेत्र में श्रद्धालुओं का तांता लग गया है। लोग दूर-दराज से शिवलिंग के दर्शन और पूजा के लिए पहुंच रहे हैं, जिससे पूरे इलाके में मेले जैसा माहौल बन गया है। बढ़ती भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा और ट्रैफिक नियंत्रण के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं।
डीएम पवन कुमार सिन्हा और एसपी अवधेश दीक्षित स्वयं हालात की निगरानी कर रहे हैं। रविवार देर शाम दोनों अधिकारी कुचायकोट पहुंचे और शिवलिंग की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। फिलहाल शिवलिंग उत्तर प्रदेश सीमा के पास कुचायकोट क्षेत्र में ही खड़ा है। शिवलिंग को आगे ले जाने में सबसे बड़ी समस्या इसके भारी वजन को लेकर है। शिवलिंग का वजन 210 टन है, जबकि इसे ले जाने वाले विशेष ट्रेलर का वजन करीब 160 टन बताया जा रहा है। यानी कुल मिलाकर लगभग 370 टन से अधिक भार सड़क और पुल पर पड़ेगा।
डीएम पवन कुमार सिन्हा ने बताया कि गोपालगंज से पूर्वी चंपारण जाने के लिए गंडक नदी (नारायणी) पर बने डुमरिया घाट पुल को पार करना जरूरी है। यह पुल पुराना और जर्जर बताया जा रहा है, जिस पर इतने भारी वजन को ले जाना जोखिम भरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग टीम पुल का तकनीकी निरीक्षण कर रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की यात्रा को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा। यदि पुल सुरक्षित नहीं पाया गया, तो वैकल्पिक मार्ग या अन्य तकनीकी उपाय तलाशे जाएंगे, जिससे शिवलिंग की स्थापना में देरी हो सकती है।
गौरतलब है कि इस विशाल शिवलिंग की यात्रा 21 नवंबर 2025 को महाबलीपुरम से शुरू हुई थी। अब तक यह कई राज्यों से गुजरते हुए 2500 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय कर चुका है। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा 17 जनवरी 2026 को प्रस्तावित है, लेकिन मौजूदा परिवहन चुनौतियां इस कार्यक्रम को प्रभावित कर सकती हैं। एक ही काले ग्रेनाइट पत्थर को तराशकर बनाए गए इस शिवलिंग पर हजारों छोटे शिवलिंग उकेरे गए हैं, जो इसे और भी खास बनाते हैं। इसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की लगातार भीड़ उमड़ रही है, जिससे आसपास का इलाका पूरी तरह भक्तिमय माहौल में बदल गया है।