अब बिहार में भी होगी केसर की खेती, सबौर कृषि विश्वविद्यालय की रिसर्च को मिला पेटेंट

Puja Srivastav
- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →

NEWS PR डेस्क: धान, मक्का, गेहूं और सब्जियों के लिए पहचाने जाने वाले बिहार में अब दुनिया के सबसे महंगे मसाले केसर की खेती भी संभव हो सकेगी। यह उपलब्धि बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के वैज्ञानिकों की मेहनत का नतीजा है, जिन्होंने केसर की खेती को बिहार की जलवायु में संभव बनाने की तकनीक विकसित की है और इस पर भारत सरकार से पेटेंट भी हासिल कर लिया है।

आमतौर पर केसर की खेती जम्मू-कश्मीर जैसे ठंडे क्षेत्रों में होती है, जहां विशेष तापमान और जलवायु की जरूरत होती है। लेकिन बिहार जैसे गर्म प्रदेश में इसे संभव बनाना अब तक एक बड़ी चुनौती माना जाता था। इस चुनौती को स्वीकार करते हुए बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के वैज्ञानिकों ने इन-विट्रो तकनीक यानी नियंत्रित तापमान और संरक्षित वातावरण में केसर उगाने का सफल प्रयोग किया है।

विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने प्लांट टिश्यू कल्चर तकनीक के जरिए बिहार की जलवायु के अनुकूल केसर के पौधे विकसित किए हैं। इसके लिए एक नया वैज्ञानिक प्रोटोकॉल तैयार किया गया है। इस शोध कार्य का नेतृत्व कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह की अध्यक्षता में रिसर्चर डॉ. अनिल सिंह ने किया, जबकि असिस्टेंट प्रोफेसर रीमा कुमारी, साजिदा बानू और पंकज कुमार इस टीम का हिस्सा रहे। भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने इस नवाचार को मान्यता देते हुए पेटेंट प्रदान किया है।

- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →

इस तकनीक के जरिए केसर की खेती बंद कमरे में नियंत्रित तापमान पर की जा सकेगी। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस विधि में मौसम की कोई बाधा नहीं होगी और सालभर केसर की खेती संभव हो पाएगी। आम तौर पर केसर की फसल तैयार होने में लगभग चार महीने लगते हैं, लेकिन इस नई तकनीक से यह फसल करीब 90 से 110 दिनों में तैयार हो जाएगी।

विश्वविद्यालय ने बताया कि इस तकनीक से राज्य के युवा और प्रगतिशील किसान केसर की खेती कर अपनी आमदनी में कई गुना बढ़ोतरी कर सकते हैं। इसके लिए बिहार कृषि विश्वविद्यालय किसानों को पौध सामग्री उपलब्ध कराएगा और केसर की खेती से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करेगा।

वैज्ञानिकों का कहना है कि बिहार की जलवायु में केसर की खेती चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन नियंत्रित तापमान और संरक्षित वातावरण में विकसित की गई यह तकनीक किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि बिहार कृषि क्षेत्र में एक नई पहचान भी बनाएगा।

- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →
Share This Article