JNU में UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद हंगामा, फूंका पुतला

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में UGC के नए नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद माहौल गर्म हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने UGC के 2026 में लागू किए गए नए नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसके चलते फिलहाल वर्ष 2012 के पुराने नियम ही लागू रहेंगे। कोर्ट के इस फैसले के विरोध में JNU के कुछ छात्रों ने कैंपस में प्रदर्शन किया।

JNU के साबरमती हॉस्टल के बाहर करीब 50 छात्रों ने इकट्ठा होकर UGC के नए नियमों के समर्थन और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने ब्राह्मणवाद का प्रतीकात्मक पुतला दहन किया। छात्रों का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला ब्राह्मणवाद और मनुवाद को बढ़ावा देता है और कैंपस में जातिगत भेदभाव को रोकने की कोशिशों को कमजोर करता है।

छात्रों का कहना है कि UGC के नए नियमों का उद्देश्य विश्वविद्यालयों में जाति, जेंडर और दिव्यांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकना था। इसके तहत हर विश्वविद्यालय में ‘इक्विटी कमेटी’ गठित करने का प्रावधान किया गया था, जो भेदभाव से जुड़े मामलों की जांच करती। हालांकि, जनरल कैटेगरी के छात्रों और कुछ संगठनों ने इन नियमों के दुरुपयोग की आशंका जताई थी।

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29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर अंतरिम रोक लगाते हुए कहा कि नियमों की भाषा अस्पष्ट है और इनके गलत इस्तेमाल से समाज में और विभाजन बढ़ सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की विस्तृत सुनवाई तक पुराने 2012 के नियम ही लागू रहेंगे। इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को तय की गई है।

UGC ने ये नए नियम रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों के बाद उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव रोकने के उद्देश्य से बनाए थे। हालांकि देशभर में हो रहे विरोध और कानूनी चुनौतियों के बीच फिलहाल इन नियमों के लागू होने पर रोक बनी हुई है।

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