NEWS PR डेस्क: पटना। बिहार अब केवल कृषि और परंपरागत रोजगार तक सीमित रहने वाला राज्य नहीं रहना चाहता। एनडीए सरकार ने राज्य को हाई-टेक इंडस्ट्री हब के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा और निर्णायक कदम उठा लिया है। सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बिहार अब राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने की तैयारी में है।
राज्य में तीन बड़ी सेमीकंडक्टर और चिप निर्माण से जुड़ी यूनिटें स्थापित की जाएंगी। अधिकारियों के मुताबिक, इन परियोजनाओं से आने वाले वर्षों में दो लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है। इससे बिहार के युवाओं को सबसे अधिक लाभ मिलेगा और उन्हें रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन नहीं करना पड़ेगा।
बिहार सेमीकंडक्टर पॉलिसी को मिली मंजूरी
इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्य सरकार ने बिहार सेमीकंडक्टर पॉलिसी को मंजूरी दे दी है। नीति के तहत अगले पांच वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था में सेमीकंडक्टर सेक्टर की हिस्सेदारी 5 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
निवेशकों को आक्रामक प्रोत्साहन
निवेश आकर्षित करने के लिए बिहार सरकार ने आक्रामक प्रोत्साहन नीति अपनाई है। केंद्र सरकार की सब्सिडी के अतिरिक्त राज्य सरकार निवेशकों को 20 प्रतिशत अतिरिक्त वित्तीय सहायता देगी। सरकार का उद्देश्य हाई-टेक कंपनियों के लिए बिहार को देश का सबसे आकर्षक निवेश गंतव्य बनाना है।
बिहार सेमीकंडक्टर मिशन का गठन
पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी के लिए बिहार सेमीकंडक्टर मिशन का गठन किया गया है। इसकी देखरेख मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति करेगी। योजना के तहत 10 से अधिक सेमीकंडक्टर डिजाइन हाउस को बढ़ावा दिया जाएगा, अत्याधुनिक चिप पैकेजिंग यूनिट्स विकसित की जाएंगी और विश्वस्तरीय सेमीकंडक्टर सेंटर स्थापित होंगे।
युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट पर फोकस
सरकार युवाओं को हाई-टेक इंडस्ट्री के लिए तैयार करने के उद्देश्य से विशेष स्किल डेवलपमेंट और ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू करेगी, ताकि बिहार की प्रतिभा सीधे सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से जुड़ सके।
विदेशी कंपनियों के GCC को भी मिलेगा बढ़ावा
इसी कड़ी में राज्य सरकार ने विदेशी कंपनियों के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) को आकर्षित करने का भी फैसला किया है। रिसर्च, डिजाइन, आईटी और बिजनेस ऑपरेशंस से जुड़े इन सेंटरों को 50 करोड़ रुपये तक का रेंटल सपोर्ट और कैपिटल सब्सिडी दी जाएगी। जो कंपनियां बिहार के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देंगी, उन्हें अतिरिक्त प्रोत्साहन भी मिलेगा।
बिहार सरकार के ये कदम साफ तौर पर संकेत देते हैं कि राज्य अब टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और रोजगार आधारित आधुनिक अर्थव्यवस्था की ओर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। यह बदलाव न सिर्फ बिहार की आर्थिक तस्वीर बदलेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए नए अवसरों के द्वार भी खोलेगा।