होली से पहले बिहार में ‘बर्ड फ्लू’ की दस्तक! पक्षियों की रहस्यमयी मौत से दहला भागलपुर

Asha Rai

NEWS PR डेस्क: बिहार में होली से पहले रंग में भंग पड़ गया है। जी हां, राज्य में बर्ड फ्लू ने दस्तक दे दी है। भागलपुर से आई खबर ने नॉनवेज खाने वालों की चिंता बढ़ा दी है। बड़ी संख्या में पक्षियों की रहस्यमयी मौत के बाद हड़कंप मचा हुआ है।

भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड में दर्जनों कौवे मृत पाए गए। सुबह टहलने पहुंचे लोगों ने जब मैदान में पड़े मृत पक्षियों को देखा तो इलाके में दहशत फैल गई।

इससे पहले नवगछिया इलाके में भी 100 से ज्यादा कौवों की मौत हुई थी, जहां जांच में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई।

पशुपालन अधिकारी अंजली कुमारी ने बताया कि ‘पक्षियों की अज्ञात मृत्यु पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है, हमने सैंडिस परिसर में पक्षियों की असामान्य मृत्यु दर्ज की है। नमूने एकत्र किए जा रहे हैं और प्रयोगशाला परीक्षण के लिए पटना भेजे जाएंगे’।

पशुपालन विभाग की टीम ने सैंपल लिए हैं और निगरानी बढ़ाने की बात कही है। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि संक्रमण रोकने के लिए बड़े स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

साथ ही बर्ड फ्लू की ख़बरों के बाद पोल्ट्री बाजार पर भी असर दिखने लगा है। चिकन की बिक्री घटी है और दामों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। कहीं 160 रुपये तो कहीं 350 रुपये प्रति किलो तक चिकन बिक रहा है। हालांकि विभाग का कहना है कि फिलहाल मुर्गियों में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एहतियातन सतर्कता बरती जा रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पक्षियों की असामान्य मौत हो रही है तो पशुपालन और स्वास्थ्य विभाग को संयुक्त रूप से त्वरित जांच, सैनिटाइजेशन और निगरानी अभियान चलाना चाहिए। समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

स्थानीय निवासी अशोक दास ने बताया कि सुबह टहलने के दौरान दर्जनों मृत कौवे पड़े मिले, जो बेहद चिंताजनक है और प्रशासन को तुरंत सफाई व जांच करानी चाहिए. 

वहीं पशुपालन पदाधिकारी ने पुष्टि की है कि सैंपल जांच में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है और लोगों से अपील की गई है कि मृत पक्षियों को न छुएं और अफवाहों से बचें।

तो फिलहाल भागलपुर में बर्ड फ्लू को लेकर हालात चिंताजनक जरूर हैं, लेकिन प्रशासन सतर्क होने का दावा कर रहा है। भागलपुर के लोगों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विभाग केवल जांच तक सीमित रहेगा या संक्रमण की रोकथाम के लिए व्यापक और ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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