बिहार में महिला सशक्तिकरण पर नीतीश सरकार का बड़ा दांव, शी-बॉक्स से सुरक्षित होगा कार्यस्थल

Asha Rai

NEWS PR डेस्क: बिहार में महिला सशक्तिकरण अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि सरकार की स्पष्ट नीति और प्रतिबद्धता का प्रतीक बन चुका है। राज्य सरकार महिलाओं को रोजगार, सम्मान और सुरक्षा देने के लिए ठोस और संस्थागत कदम उठा रही है। नौकरियों में बराबरी की भागीदारी, कार्यस्थलों पर भेदभाव समाप्त करने और आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने जैसे प्रयासों को नई गति मिली है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को इस दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है, जिसने बड़े पैमाने पर महिलाओं को सशक्त बनाने का ठोस खाका पेश किया है।

ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार ने पटना के बापू टावर में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में ये बातें कहीं। कार्यशाला का आयोजन जीविका के माध्यम से किया गया, जिसमें लैंगिक संवेदनशीलता, POSH Act और SHe-Box पोर्टल के प्रभावी संचालन पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि जब समाज में न्याय और समानता की सोच मजबूत होती है, तभी लोकतंत्र अपनी असली कसौटी पर खरा उतरता है और नए सामाजिक मानदंड स्थापित होते हैं।

प्रधान सचिव ने आजादी से पहले और बाद के सामाजिक आंदोलनों का उल्लेख करते हुए वर्ष 2012 के निर्भया कांड को याद किया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था और उसके बाद बने सख्त कानूनों ने महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को नई कानूनी मजबूती दी। इन सुधारों के परिणामस्वरूप आज कार्यस्थलों और सार्वजनिक स्थलों पर महिला सुरक्षा को लेकर जागरूकता पहले से कहीं अधिक बढ़ी है।

कार्यक्रम में अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने कहा कि सशक्तिकरण केवल आर्थिक मजबूती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सम्मान और सुरक्षा की गारंटी भी शामिल है। उन्होंने सुरक्षित और संवेदनशील कार्यस्थल को संस्थागत विकास की बुनियाद बताया। साथ ही जानकारी दी कि शी-बॉक्स पोर्टल पर आंतरिक शिकायत समिति का गठन और पंजीकरण अब अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि लैंगिक उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों का त्वरित और पारदर्शी समाधान सुनिश्चित हो सके।

इसके बाद जेंडर स्पेशलिस्ट गुंजन बिहारी और नोडल ऑफिसर अंकिता कश्यप ने जीविका और आशा कार्यकर्ताओं को पॉश एक्ट और शी-बॉक्स पोर्टल की प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम में जीविका के निदेशक राम निरंजन सिंह और निदेशक (उद्यम) विनय कुमार राय सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

स्पष्ट है कि बिहार में नारी शक्ति अब केवल राजनीतिक संकल्प का हिस्सा नहीं, बल्कि संस्थागत ढांचे के जरिए सशक्तिकरण की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रही है।

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