NEWS PR डेस्क : मुजफ्फरपुर जिले में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत किए गए सर्वे का काम पूरा हो चुका है। जिले के सभी 16 प्रखंडों में कुल 4.43 लाख परिवारों का सर्वे कर उन्हें संभावित लाभार्थियों की सूची में शामिल किया गया था। हालांकि अब ग्रामीण विकास विभाग स्तर पर इन आवेदनों की जांच की जा रही है, जिसमें बड़ी संख्या में विवादित मामले सामने आए हैं।
जांच के दौरान पाया गया कि करीब 1.75 लाख आवेदनों पर आपत्ति दर्ज की गई है। इन सभी मामलों का सत्यापन कराया जा रहा है। अब तक डेढ़ लाख से अधिक आवेदनों की जांच पूरी हो चुकी है, जबकि शेष मामलों का सत्यापन अगले दो-तीन दिनों में पूरा होने की उम्मीद है।
जानकारी के अनुसार सर्वेक्षण के बाद पंचायत सचिवों और रोजगार सेवकों के माध्यम से आवेदनों की दोबारा जांच कराई गई। इसी प्रक्रिया में कई मामलों में सर्वे विभागीय मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाने की शिकायतें सामने आईं, जिसके बाद विभाग ने विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
बताया गया है कि सर्वे में शामिल 4.43 लाख परिवारों में करीब 65 हजार ऐसे परिवार भी हैं, जिन्होंने खुद से ऑनलाइन सेल्फ सर्वे किया था। जांच में सबसे अधिक त्रुटियां इन्हीं सेल्फ सर्वे वाले आवेदनों में सामने आई हैं। कई ऐसे परिवार भी सूची में शामिल हो गए हैं जिनके पास पहले से पक्का मकान या चारपहिया वाहन है।
सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम रिपोर्ट जिला मुख्यालय को भेजी जाएगी। इसके आधार पर जिन आवेदनों को सही पाया जाएगा, उन्हीं का नाम अंतिम सूची में रखा जाएगा। संभावना जताई जा रही है कि जांच के बाद हजारों परिवारों के नाम सूची से हटाए जा सकते हैं।
इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए उप विकास आयुक्त ने सर्वे डाटा के दो प्रतिशत हिस्से का विशेष सत्यापन कराने की जिम्मेदारी विभिन्न अधिकारियों को सौंपी है। इसमें सभी प्रखंडों के वरीय पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी मनरेगा, बीडीओ, लोहिया स्वच्छ बिहार मिशन के जिला समन्वयक और मनरेगा के सहायक अभियंता समेत कई अधिकारी शामिल हैं। उनसे जल्द से जल्द जांच पूरी कर रिपोर्ट देने को कहा गया है।