NEWS PR डेस्क : बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए हो रहे चुनाव ने इस बार राजनीतिक माहौल को काफी गर्म कर दिया है। आम तौर पर ऐसे चुनाव विधायकों की संख्या के आधार पर आसानी से तय हो जाते हैं, लेकिन इस बार छह उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से मुकाबला दिलचस्प बन गया है। खासकर पांचवीं सीट को लेकर सत्ता पक्ष और महागठबंधन के बीच राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और हर विधायक का वोट अहम माना जा रहा है।
इस चुनाव में कांग्रेस विधायकों की भूमिका पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। विधानसभा में कांग्रेस के छह विधायक हैं और उनके वोट महागठबंधन के उम्मीदवार के लिए काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि कुछ विधायकों के अन्य दलों के नेताओं से पुराने संबंध रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि मतदान के दौरान सभी विधायक पार्टी लाइन का ही पालन करेंगे या कोई अलग स्थिति भी सामने आ सकती है।
दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस ने अभी तक अपने विधायक दल का नेता और सचेतक घोषित नहीं किया है। ऐसे में पार्टी के विधायक बिना औपचारिक नेतृत्व के ही इस अहम चुनाव में हिस्सा ले रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस स्थिति में हर विधायक का फैसला चुनावी गणित को प्रभावित कर सकता है, इसलिए कांग्रेस के विधायकों पर विशेष नजर रखी जा रही है।
इधर महागठबंधन ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए विशेष रणनीति अपनाई है। कई विधायकों को मतदान से पहले पटना के एक होटल में ठहराया गया ताकि किसी तरह की टूट या क्रॉस वोटिंग की संभावना को रोका जा सके। हालांकि देर रात कुछ कांग्रेस विधायकों के होटल नहीं पहुंचने की खबरें सामने आईं, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। बाद में पार्टी नेताओं ने इन खबरों को केवल अटकल बताया।
इस बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कांग्रेस के दो विधायकों के गायब होने की खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ अफवाह है और भाजपा की ओर से भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। तेजस्वी ने दावा किया कि महागठबंधन के सभी विधायक एकजुट हैं और अपने उम्मीदवार के समर्थन में मतदान करेंगे।
राजनीतिक समीकरण में एआईएमआईएम के विधायकों की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने संकेत दिया कि राजनीति में अंतिम समय तक कई तरह के बदलाव संभव होते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार की राजनीति में कई बार अप्रत्याशित फैसले देखने को मिलते हैं, इसलिए सभी दल अपने-अपने समीकरण साधने में लगे हुए हैं।
राज्यसभा चुनाव के गणित की बात करें तो एक सीट जीतने के लिए किसी उम्मीदवार को 41 वोटों की जरूरत होती है। बिहार विधानसभा में कुल 243 विधायक हैं और पांच सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। संख्या बल के आधार पर एनडीए के पास 202 विधायकों का समर्थन है, जिससे उसकी चार सीटें लगभग तय मानी जा रही हैं। हालांकि पांचवीं सीट के लिए उसे अभी भी तीन अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ सकती है।
महागठबंधन की ओर से राजद के उम्मीदवार ए. डी. सिंह मैदान में हैं। उनके पक्ष में राजद, कांग्रेस और वाम दलों के वोट माने जा रहे हैं। यदि उन्हें अन्य दलों का समर्थन मिलता है तो मुकाबला और रोचक हो सकता है। यही कारण है कि इस बार राज्यसभा चुनाव में पांचवीं सीट को लेकर राजनीतिक गतिविधियां काफी तेज हो गई हैं और सभी की नजरें अंतिम परिणाम पर टिकी हुई हैं।