NEWS PR डेस्क: बिहार में पशुधन और दुग्ध उत्पादन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने कई योजनाएं लागू की हैं, जिनका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, रोजगार सृजन करना और डेयरी सेक्टर को संगठित करना है। पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन विभाग द्वारा संचालित इन योजनाओं का लाभ राज्य के लाखों किसानों तक पहुंच रहा है।
सरकार की प्रमुख योजना राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और उनके आनुवंशिक सुधार पर जोर दिया जा रहा है। इससे दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हो रही है और किसानों को अधिक लाभ मिल रहा है। बीते तीन वर्षों में कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के जरिए 33 लाख से अधिक दुग्ध उत्पादक किसानों को लाभ मिला है।
वहीं राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत बिहार में 70 लाख रुपये की लागत वाली दो परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिन पर 14 लाख रुपये की सब्सिडी दी गई है। इसके अलावा चारा उत्पादन, पशु आहार और नस्ल सुधार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए पशुधन बीमा योजना भी चलाई जा रही है, जिसमें प्रीमियम पर सरकार की ओर से सहायता दी जाती है। साथ ही पशुपालन अवसंरचना विकास कोष के तहत 3 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी के जरिए पशुधन उत्पादों के प्रसंस्करण और विपणन अवसंरचना को मजबूत किया जा रहा है।
डेयरी क्षेत्र में राष्ट्रीय दुग्ध विकास कार्यक्रम के तहत बिहार में 19 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनकी कुल लागत 346 करोड़ रुपये से अधिक है। इन परियोजनाओं के जरिए दूध परीक्षण, भंडारण और विपणन सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है, जिससे किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध हो सके।
इसके अलावा, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के जरिए पशुपालकों को सस्ती दर पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे चारा, पशु चिकित्सा और आधुनिक तकनीकों में निवेश कर सकें। मार्च 2025 तक राज्य में 2.54 लाख से अधिक केसीसी खाते सक्रिय थे।
पशुओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। अब तक बिहार में मुंह-खुर रोग (FMD) के खिलाफ 8 करोड़ से अधिक और ब्रुसेलोसिस के खिलाफ 32 लाख से ज्यादा टीकाकरण किए जा चुके हैं।
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि इन योजनाओं से न केवल डेयरी सेक्टर को मजबूती मिल रही है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में भी मदद मिल रही है।