अनंत सिंह को बेल कैसे मिली? पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पलटा पूरा केस! गवाहों के बयान में भी अंतर; केस में नया मोड़!

Asha Rai
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NEWS PR डेस्क: मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह को जेल से रिहाई मिल गई है। बाहर आते ही उन्होंने समर्थकों के साथ शक्ति प्रदर्शन किया और पटना स्थित अपने विधायक आवास पहुंचे। इसके बाद उनके मोकामा जाने का कार्यक्रम तय है। उन्हें दुलारचंद यादव हत्याकांड में 15-15 हजार रुपये के बेल बॉन्ड पर जमानत दी गई है। हालांकि, यह राहत कई शर्तों के साथ मिली है और मामले में अंतिम फैसला अभी बाकी है।

यह मामला विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुए दुलारचंद यादव हत्याकांड से जुड़ा है। इस घटना ने राजनीतिक और कानूनी हलकों में व्यापक चर्चा को जन्म दिया था। अब पटना हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद जांच प्रक्रिया, पुलिस की थ्योरी और साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।

अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के तर्कों ने केस की दिशा को प्रभावित किया। अनंत सिंह की ओर से पेश वकील ने कहा कि वह पूरी तरह निर्दोष हैं और उन्हें झूठा फंसाया गया है। वकील ने यह भी बताया कि अब तक उनके कब्जे से कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई है।

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साथ ही कहा गया कि पुलिस की चार्जशीट में ऐसे ठोस साक्ष्य नहीं हैं, जो सीधे उनकी संलिप्तता साबित करें। बचाव पक्ष ने FIR का हवाला देते हुए कहा कि आरोप के अनुसार गोली पैर की एड़ी पर लगी थी। उन्होंने कहा कि यह साबित नहीं होता कि गोली जान लेने के इरादे से चलाई गई थी। गोली शरीर के किसी अहम हिस्से पर नहीं लगी और न ही बार-बार फायरिंग की गई।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि घटनाक्रम और साक्ष्यों में स्पष्ट विरोधाभास है। इससे यह संकेत मिलता है कि जांच के दौरान तथ्यों का सही आकलन नहीं किया गया। वकील ने इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए राहत देने की मांग की।

मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सबसे अहम साबित हुई। बचाव पक्ष ने बताया कि रिपोर्ट में मौत का कारण गोली नहीं बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, मौत किसी कठोर वस्तु से लगी गंभीर चोट के कारण हुई। इसमें फेफड़ों और हृदय के क्षतिग्रस्त होने से hypovolemic shock बताया गया है।

बचाव पक्ष का कहना है कि ऐसी चोटें सह-आरोपियों से जुड़ी हैं, न कि अनंत सिंह से। इस आधार पर FIR और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट विरोधाभास बताया गया।

केस डायरी के पैराग्राफ 212 का भी हवाला दिया गया। बताया गया कि सूचक के पिता ने अपने बयान में किसी का नाम नहीं लिया। उन्होंने सिर्फ यह कहा कि उन्हें फोन पर बेटे की मौत की सूचना मिली थी।

गवाहों के बयानों में भी कई तरह के विरोधाभास सामने आए। कुछ गवाहों ने मारपीट और फायरिंग की बात कही। लेकिन किसी ने स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया कि गोली किसने चलाई। इससे अभियोजन पक्ष की कहानी पर सवाल खड़े हो गए।

FIR के अनुसार, 30 अक्टूबर 2025 को मोकामा के बसावनचक इलाके में घटना हुई थी। यह घटना एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान हुई थी।
बताया गया कि दो पक्षों के बीच पहले बहस हुई और फिर झड़प शुरू हो गई।

इसके बाद फायरिंग की आवाज सुनाई दी और मौके पर भगदड़ मच गई। गवाहों के अनुसार, दुलारचंद यादव को गोली लगी और वह गिर पड़े।
आरोप है कि इसके बाद गाड़ियां उनके ऊपर से गुजर गईं, जिससे हालत और गंभीर हो गई। बाद में अस्पताल ले जाने के दौरान उनकी मौत हो गई।

FIR में यह भी कहा गया है कि घटनास्थल से FSL टीम ने साक्ष्य जुटाए। इनमें टूटे कांच, मिट्टी के नमूने और अन्य सबूत शामिल हैं। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मौत का असली कारण गोली थी या कुचलना।

इस पूरे मामले में जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और FIR के बीच अंतर ने कई शंकाएं पैदा कर दी हैं। बचाव पक्ष का आरोप है कि जांच सही तरीके से नहीं की गई।

वहीं पीड़ित पक्ष का कहना है कि गवाहों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनका दावा है कि आरोपियों की भूमिका स्पष्ट है और उन्हें राहत नहीं मिलनी चाहिए थी।

फिलहाल अनंत सिंह को जमानत मिल चुकी है। लेकिन मामला अभी अदालत में विचाराधीन है। अंतिम फैसला आने के बाद ही सच्चाई सामने आ पाएगी। इस केस ने बिहार की राजनीति और जांच प्रणाली दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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