NEWS PR डेस्क: पटना, 4 अप्रैल। बिहार में विकास के साथ पर्यावरण संतुलन को प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार बड़े स्तर पर हरियाली अभियान चलाने की तैयारी में है। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने घोषणा की कि पटना के मरीन ड्राइव पर अगले तीन महीने में एक लाख पेड़ लगाए जाएंगे।
शनिवार को होटल ताज सिटी सेंटर में आयोजित “मानव-वन्यजीव : द्वंद से सह-अस्तित्व की ओर” विषयक कार्यशाला में सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य में जहां भी विकास कार्यों के कारण पेड़ कटते हैं, उसके बदले अन्य स्थानों पर उससे अधिक संख्या में पौधारोपण किया जाता है। उन्होंने बताया कि पिछले लगभग 20 वर्षों में लगातार वृक्षारोपण के प्रयासों से बिहार का वन क्षेत्र 6 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव को कम करने के लिए भी लगातार काम कर रही है। पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए भी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। वाल्मीकिनगर में करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से ‘लव-कुश पार्क’ विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा मरीन ड्राइव के पास विश्वस्तरीय एक्वेरियम बनाने की योजना पर भी काम जारी है। पटना में जल्द ही वाटर मेट्रो सेवा शुरू करने की भी तैयारी है।
कार्यशाला में केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री एवं मुजफ्फरपुर सांसद डॉ. राज भूषण चौधरी ने कहा कि हाल के वर्षों में मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष बढ़ा है, जिसका मुख्य कारण वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास का नष्ट होना है। उन्होंने वन्य जीवों के कॉरिडोर के संरक्षण और इसमें जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
वहीं, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि पटना-डोभी ग्रीन कॉरिडोर में पीपल, नीम, पाकड़ और जामुन जैसे देशी प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
कार्यक्रम में वाल्मीकिनगर के सांसद सुनील कुमार ने भी प्रकृति में संतुलन बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया और कहा कि मानव और वन्यजीवों का सह-अस्तित्व जरूरी है।
इस अवसर पर बक्सर सांसद सुधाकर सिंह, आरा सांसद सुदामा प्रसाद, पर्यावरण विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर, प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रभात कुमार, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक अभय कुमार सहित कई अन्य अधिकारी और पर्यावरणविद मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान भीमबांध वन्यप्राणी आश्रयणी की सर्वे रिपोर्ट का भी विमोचन किया गया।
सरकार का यह हरियाली अभियान न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, बल्कि इससे शहरी क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाने और जलवायु संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।