सीधे हाईवे से जुड़ रहे बिहार के गांव, 1.21 लाख ग्रामीण बसावटों को पक्की सड़कों से जोड़ने का काम पूरा

धानमंत्री ग्राम सड़क योजना, मुख्यमंत्री ग्राम सम्पर्क योजना एवं ग्रामीण टोला सम्पर्क निश्चय योजना के तहत कुल 1,29,990 संपर्क विहीन ग्रामीण बसावटों की पहचान की गई थी। इनमें अबतक कुल 1,21,151 बसावटों को 1,20,178 किलोमीटर से अधिक लंबी पक्की बारहमासी सड़कों के माध्यम से जोड़ा जा चुका है।

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: पटना, 08 अप्रैल। दशकों से संपर्क विहीन रही राज्य की 1.21 लाख ग्रामीण बसावटों को बारहमासी पक्की सड़कों से जोड़ने के बाद अब उन ग्रामीण बसावटों का सीधा जुड़ाव बड़े राजमार्गों से किया जा रहा है। इसके लिए ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा राज्य में सुलभ संपर्कता योजना की शुरुआत की गई है। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों को सीधे उच्च श्रेणी के मार्गों से जोड़ते हुए विकास की गति को नई रफ्तार देने वाला है।

उल्लेखनीय है कि राज्य में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, मुख्यमंत्री ग्राम सम्पर्क योजना एवं ग्रामीण टोला सम्पर्क निश्चय योजना के तहत कुल 1,29,990 संपर्क विहीन ग्रामीण बसावटों की पहचान की गई थी। इनमें अबतक कुल 1,21,151 बसावटों को 1,20,178 किलोमीटर से अधिक लंबी पक्की बारहमासी सड़कों के माध्यम से जोड़ा जा चुका है। वहीं शेष बसावटों को भी शीघ्र पक्की ग्रामीण सड़क से जोड़ने के लिए कार्य तीव्र गति से प्रगति पर है। इस व्यापक ग्रामीण सड़क संपर्कता अभियान ने ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की बुनियादी समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया है। इस दिशा में कार्य तेज गति से प्रगति पर है। इस योजना के तहत अब तक कुल 74 नई योजनाओं का चयन किया गया है, जिनमें से 65 योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। साथ ही 16 महत्वपूर्ण योजनाओं पर निर्माण कार्य भी प्रारंभ कर दिए गए हैं।

बसावटों के पक्की सड़कों से जुड़ने के बाद अब सुलभ संपर्कता योजना के माध्यम से इस बुनियादी संपर्कता को और अधिक सुलभ बनाया जा रहा है। राज्य के कई ऐसे गांव और टोले हैं, जहां मुख्य सड़कों तक पहुंचने के लिए लोगों को संकरे, घुमावदार और कच्चे रास्तों से होकर गुजरना पड़ता था। विशेषकर बारिश के दिनों में यह सफर एक बड़ी चुनौती बन जाता था। इस नई योजना के माध्यम से राज्य के उन दुर्गम और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों को अब सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच), राज्य राजमार्ग (एसएच) तथा वृहद जिला पथों से जोड़ा जा रहा है। इसके तहत क्षेत्रीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नए सुलभ मार्गों और वैकल्पिक रास्तों (थ्रू रूट या बाईपास) का नवनिर्माण तथा जर्जर हो चुकी सड़कों का पुनर्निर्माण किया जा रहा है, ताकि संकरे रास्तों के जाम से ग्रामीणों को मुक्ति मिल सके।

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सूबे की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई धार

इसका सबसे सकारात्मक प्रभाव राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर पड़ेगा। अब ग्रामीणों को अपनी पंचायत, प्रखंड, अनुमंडल या सीधे जिला मुख्यालय जाने में किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही संकरे रास्तों का मजबूत विकल्प तैयार होने से व्यावसायिक वाहनों का आवागमन सुगम हो जाएगा और आपातकालीन स्थितियों में एंबुलेंस बिना जाम में फंसे सीधे हाईवे का रास्ता ले सकेगी।

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