सोन नदी किनारे जल संकट गहराया, अवैध खनन से बदली धारा पर ग्रामीणों का विरोध

Amit Singh

NEWS PR डेस्क: सासाराम, 10 अप्रैल। गर्मी की शुरुआत के साथ ही सोन नदी के तटीय इलाकों में जल संकट गंभीर रूप लेता जा रहा है। डेहरी, डालमियानगर, न्यू सिधौली से लेकर नासरीगंज तक सैकड़ों गांवों में पेयजल की समस्या गहरा गई है। जलस्तर तेजी से नीचे खिसकने के कारण लोगों को पीने के पानी के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि सोन नदी में हो रहे अवैध बालू खनन ने इस संकट को और बढ़ा दिया है। उनका कहना है कि खनन के लिए नदी की मुख्य धारा को बांध बनाकर दूसरी ओर मोड़ दिया गया है, जिससे आसपास के इलाकों में भूजल स्तर पर गंभीर असर पड़ा है। पहले जहां 30 से 40 फीट पर पानी मिल जाता था, वहीं अब 70 से 80 फीट तक खुदाई करने के बाद भी पानी नहीं मिल रहा है।

जलस्तर गिरने का सीधा असर खेती पर भी पड़ा है। इलाके के किसान, जो सब्जी उत्पादन पर निर्भर हैं, सिंचाई के लिए पानी के अभाव से परेशान हैं। चापाकल, कुएं और मोटर पंप सूखने की कगार पर हैं, जिससे रोजमर्रा की जरूरतें भी पूरी करना मुश्किल हो गया है।

ग्रामीणों ने राज्य सरकार की नल-जल योजना पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि योजना के तहत पानी की आपूर्ति अनियमित है और कई बार दिनों तक सप्लाई बाधित रहती है, जिससे विशेष रूप से मजदूर और गरीब तबका अधिक प्रभावित हो रहा है।

इस पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन और खनन विभाग से मांग की है कि अवैध बालू खनन पर तत्काल रोक लगाई जाए और नदी की मूल धारा को बहाल किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में जल संकट और भी भयावह रूप ले सकता है।

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