मुजफफरपुर में साइबर अपराध का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को हैराान कर दिया है। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगों ने एक रिटायर्ड बैंक मैनेजर को अपने जाल में फसाकर 67 लाख रूपये की बड़ी ठगी को अंजाम दिया है।
पटना से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है
वहीं इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर रिटायर्ड बैंक मैनेजर से 67 लाख रुपये की ठगी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पटना से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस घटना ने एक बार फिर राज्य में सक्रिय साइबर ठगों के नेटवर्क पर सवाल खड़े कर दिए हैं।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राजीव नगर थाना क्षेत्र के फ्रेंड्स कॉलोनी, आशियाना नगर निवासी प्रियरंजन शर्मा और उनके पुत्र अनंत अभिषेक के रूप में हुई है। दोनों पर साइबर अपराधियों के साथ मिलकर संगठित ठगी का नेटवर्क चलाने का आरोप है।
आरोपियों के आवास से भारी मात्रा में संदिग्ध सामग्री बरामद की गई
पुलिस की छापेमारी में आरोपियों के आवास से भारी मात्रा में संदिग्ध सामग्री बरामद की गई। इनमें अलग-अलग बैंकों की एक दर्जन से अधिक चेकबुक, कई मुहरें और दस्तावेज शामिल हैं। इसके अलावा 23,900 रुपये नकद, एक लैपटॉप, तीन मोबाइल फोन, 19 बैंक पासबुक, चार मुहर और एक पेन ड्राइव भी जब्त किया गया है।जांच में सामने आया है कि प्रियरंजन शर्मा एक एनजीओ के माध्यम से कई बैंक खाते संचालित करते थे। इसी नेटवर्क के तहत दो दर्जन से अधिक बैंक खाते खोले गए थे, जिन्हें साइबर अपराधियों को किराए पर दिया जाता था। इसके बदले में उन्हें करीब 3 प्रतिशत कमीशन मिलता था।
मामले की गहन जांच जारी
पुलिस के अनुसार, ठगी की गई कुल 67 लाख रुपये में से 25 लाख रुपये प्रियरंजन शर्मा के खाते में ट्रांसफर किए गए थे, जबकि बाकी 42 लाख रुपये जयपुर के एक अन्य बैंक खाते में भेजे गए।साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी खुद को पुलिस, सीबीआई और टेलीकॉम विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाते थे और ठगी को अंजाम देते थे।फिलहाल पुलिस इस पूरे साइबर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है और मामले की गहन जांच जारी है।
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