गया शहर स्थित विष्णुपद मंदिर परिसर में प्रस्तावित विष्णुपद कॉरिडोर निर्माण के विरोध में जन-जागरण अभियान के तहत प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य गया जी की प्राचीन संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की मांग को प्रमुखता से उठाना था।

“विकास चाहिए, लेकिन विरासत की कीमत पर नहीं”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में विष्णुपद प्रबंध कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष शंभू लाल विट्ठल ने कहा कि कॉरिडोर निर्माण की मांग मूल रूप से विकास को ध्यान में रखकर की गई थी, लेकिन वर्तमान योजना में प्राचीन धरोहरों और सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचने की आशंका है। उन्होंने बताया कि समाज के व्यापक विरोध को देखते हुए जिला प्रशासन को लिखित आपत्ति पत्र भी सौंपा गया है। उन्होंने कहा,“विकास जरूरी है, लेकिन हमारी प्राचीन पहचान और धार्मिक विरासत की कीमत पर नहीं। समाज की भावनाओं और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।”

योजना पर उठे सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद स्वामी वेंकटेश ने कहा कि यदि स्थानीय लोगों, धार्मिक संगठनों और विशेषज्ञों की राय लेकर योजना बनाई जाती, तो इतना व्यापक विरोध देखने को नहीं मिलता। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना पर्याप्त संवाद और सामाजिक सहमति के योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा,“टेबल पर बैठकर बनाई गई योजनाएं जब समाज पर थोपी जाती हैं, तब उसका विरोध स्वाभाविक है। कॉरिडोर निर्माण के नाम पर गया जी की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।”

संत समाज और स्थानीय लोगों की मांग
संत समाज और स्थानीय नागरिकों ने स्पष्ट किया कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन ऐसा विकास होना चाहिए जिसमें सनातन परंपरा, धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण सुनिश्चित हो। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मांग की गई कि विष्णुपद विकास योजना में प्राचीन मंदिरों, धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए तथा समाज की सहमति के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए। कार्यक्रम में विष्णुपद पंडा समाज, संत समाज के प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। सम्मेलन के दौरान लोगों ने एकजुट होकर गया जी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने की अपील की।
गया से आशिष कुमार की रिपोर्ट