बिहार में कोचिंग संस्थानों के लिए नए नियम, फीस से लेकर रिजल्ट तक सख्ती

फीस से लेकर सुविधाओं तक, कोचिंग सेंटरों पर होगी सख्त निगरानी

Rashmi Tiwari
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बिहार में कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर जल्द लगाम लग सकती है। राज्य सरकार ने कोचिंग सेंटरों को नियंत्रित करने के लिए नए कानून का ड्राफ्ट तैयार किया है। शिक्षा विभाग की ओर से लाए जा रहे इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य छात्रों और अभिभावकों को राहत देना और कोचिंग संस्थानों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।


नए नियमों के मुताबिक राज्य में वे सभी कोचिंग संस्थान इस कानून के दायरे में आएंगे, जहां 25 से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं। सरकार ने साफ किया है कि बिना रजिस्ट्रेशन कोई भी कोचिंग संस्थान संचालित नहीं किया जा सकेगा। नियमों का उल्लंघन करने पर 50 हजार से 2 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, जबकि बिना रजिस्ट्रेशन कोचिंग चलाने पर 1 लाख रुपए तक की पेनाल्टी और रजिस्ट्रेशन रद्द करने की कार्रवाई भी हो सकती है।


ड्राफ्ट के अनुसार हर कोचिंग संस्थान को रजिस्ट्रेशन के लिए 15 हजार रुपए शुल्क देना होगा। यदि किसी संस्थान की कई शाखाएं हैं, तो प्रत्येक ब्रांच का अलग रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा। यह रजिस्ट्रेशन तीन साल तक मान्य रहेगा और जिला स्तरीय जांच कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर ही मंजूरी दी जाएगी।
बची हुई फीस वापस करनी होगी
सरकार ने छात्रों की सुविधाओं और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई अहम प्रावधान भी जोड़े हैं। हर छात्र के लिए कम से कम 2 वर्ग फीट जगह देना अनिवार्य होगा। शिक्षकों का ग्रेजुएट होना जरूरी रहेगा और एक बैच में छात्रों की तय संख्या पहले से घोषित करनी होगी, जिसे बाद में बढ़ाया नहीं जा सकेगा। इसके अलावा कोचिंग संस्थानों को छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए काउंसलर रखना होगा। स्टडी मटेरियल और नोट्स के नाम पर अतिरिक्त फीस वसूलने पर रोक रहेगी। अगर कोई छात्र बीच में कोर्स छोड़ता है, तो बची हुई फीस वापस करनी होगी।
रिजल्ट का सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं कर सकेंगे
सरकार ने रिजल्ट और टॉपर्स के प्रचार को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। नए नियमों के तहत कोचिंग संस्थान छात्रों के रिजल्ट का सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं कर सकेंगे। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे छात्रों पर अनावश्यक मानसिक दबाव कम होगा। इन नियमों की निगरानी के लिए राज्य और जिला स्तर पर विशेष कमिटी बनाई जाएगी। शिक्षा विभाग के ACS इसकी अध्यक्षता करेंगे। कमिटी में पुलिस, स्वास्थ्य, समाज कल्याण और कौशल विकास विभाग के अधिकारियों के साथ छात्र, अभिभावक और कोचिंग संस्थानों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा। फिलहाल सरकार ने इस ड्राफ्ट पर आम लोगों से सुझाव मांगे हैं। माना जा रहा है कि सुझावों के बाद जल्द ही इसे कानून का रूप दिया जा सकता है।

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