NEWS PR डेस्क: नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में कुछ नेता चुनाव जीतकर सत्ता तक पहुंचते हैं, जबकि कुछ नेता राजनीति के तौर-तरीकों और संवाद की भाषा पर गहरा प्रभाव छोड़ते हैं। नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर इन दोनों पहलुओं का उदाहरण है। 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में जन्मे मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संगठनात्मक राजनीति की शुरुआत की और बाद में भारतीय जनता पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संगठन से सत्ता तक का सफर
मोदी का शुरुआती राजनीतिक विकास चुनाव लड़ने से ज्यादा संगठन निर्माण से जुड़ा रहा। 1980 और 1990 के दशक में भाजपा के विस्तार के दौरान उन्होंने संगठन, कार्यकर्ता नेटवर्क और चुनावी रणनीति पर काम किया। राष्ट्रीय संगठन में जिम्मेदारियों ने उन्हें अलग-अलग राज्यों की राजनीति को करीब से समझने का अवसर दिया।
7 अक्टूबर 2001 को उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इसके बाद उनके राजनीतिक सफर में ‘गुजरात मॉडल’ एक प्रमुख पहचान बना। निवेश, बुनियादी ढांचे, बिजली, सड़क और प्रशासनिक तकनीक को विकास के राजनीतिक संदेश से जोड़ा गया।
हालांकि, 2002 के गुजरात दंगों ने उनके राजनीतिक जीवन पर गंभीर सवाल भी खड़े किए। इस मुद्दे पर जांच और न्यायिक प्रक्रियाएं हुईं। 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने जकिया जाफरी से जुड़े मामले में एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।
2014 में राष्ट्रीय राजनीति का नया अध्याय
2013 में भाजपा ने मोदी को 2014 लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया। चुनाव अभियान में सोशल मीडिया, 3D होलोग्राम, ‘चाय पर चर्चा’ और बड़े जनसभाओं का व्यापक इस्तेमाल हुआ। भाजपा ने 282 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया और 26 मई 2014 को मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।
पहले कार्यकाल में जन धन, स्वच्छ भारत, उज्ज्वला, आवास, डिजिटल भुगतान और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण जैसी योजनाओं ने सरकार की ‘लाभार्थी राजनीति’ को आकार दिया। वहीं 2016 की नोटबंदी और 2017 में जीएसटी जैसे फैसले बड़े आर्थिक प्रयोगों के रूप में सामने आए।
2019 से तीसरे कार्यकाल तक
2019 में भाजपा ने 303 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की। इसके बाद अनुच्छेद 370 में बदलाव, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन, नागरिकता संशोधन कानून और राम मंदिर निर्माण जैसे मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहे।
कोविड-19 महामारी, किसान आंदोलन और कृषि कानूनों की वापसी ने सरकार के सामने बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौतियां भी रखीं।
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 240 सीटें मिलीं। एनडीए के साथ सरकार बनी और 9 जून 2024 को मोदी ने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इस बार सरकार का संसदीय आधार पहले दो कार्यकालों की तुलना में अधिक गठबंधन-आधारित है।
मोदी की राजनीति की पहचान
मोदी की राजनीति में विकास, कल्याणकारी योजनाएं, हिंदुत्व, राष्ट्रवाद, डिजिटल संचार और व्यक्तिगत नेतृत्व समानांतर रूप से दिखाई देते हैं। ‘मन की बात’ से लेकर सोशल मीडिया और बड़े सार्वजनिक अभियानों तक सीधे संवाद उनकी राजनीतिक शैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
सितंबर 2026 में उनकी राजनीतिक यात्रा 25 वर्षों से अधिक के शीर्ष नेतृत्व का अनुभव समेटे हुए है। उनका अंतिम ऐतिहासिक मूल्यांकन अभी भविष्य के गर्भ में है, लेकिन इतना स्पष्ट है कि नरेंद्र मोदी ने भारतीय राजनीति के चुनावी अभियान, राजनीतिक संचार और सत्ता के तौर-तरीकों को एक नए दौर में पहुंचाया है।