भागलपुर में दुर्गा विसर्जन का भावुक नजारा, सिंदूर खेला के बाद नम आंखों से मां दुर्गा को दी विदाई; अगले साल फिर आने का वादा !

Muskan Gupta

भागलपुर में दुर्गा पूजा उत्साह, आस्था और उल्लास के साथ देखने को मिला शहर के विभिन्न दुर्गा मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी लोगों ने मां दुर्गा के दर्शन किए और मेले का आनंद उठाया चारों ओर भक्तिमय माहौल के बीच विजयादशमी पर बंगाली परंपरा के अनुसार मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला शुरू हुआ मां के जयकारों से गूंजती गलियां, सिंदूर से सजे चेहरे और नम आंखों में विदाई का दर्द आस्था, निष्ठा और सद्भाव के साथ मनाए गए दुर्गा पूजा महोत्सव के बाद अब मां दुर्गा की विदाई का भावुक पल सामने आया है रेशमी नगरी भागलपुर में विजयादशमी के अवसर पर बंगाली परंपरा के अनुसार मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया इस दौरान कहीं भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी, तो कहीं महिलाओं ने सिंदूर खेलकर मां को अगले बरस फिर आने का निमंत्रण दिया। मां की विदाई के इस दृश्य ने हर किसी को भावुक कर दिया.


भागलपुर के दुर्गाबाड़ी और काली बाड़ी में मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन बांग्ला विधि विधान के साथ दीपनगर घाट पर संपन्न हुई वहीं नाथनगर क्षेत्र में भी मां दुर्गा की विदाई पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुई महाशय ड्योढ़ी की मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन बंगाली टोला घाट पर, जबकि सुजानपुर दुर्गा मंदिर की प्रतिमा का विसर्जन चंपा नदी घाट पर किया गया


वहीं, गोपीनाथ घोष लेन, लखीकांत आचार्य लेन और,
चमरू साह लेन की मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन मखदूम शाह दरगाह घाट पर संपन्न हुआ इस दौरान घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ और मां के जयकारों के बीच पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा


लेकिन मां की विदाई का यह पल जितना पावन था, उतना ही भावुक भी मां दुर्गा को अंतिम विदाई देते समय श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं

महिलाओं ने विधि-विधान के साथ मां की आरती उतारी और,

परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली तथा समाज में शांति और सद्भाव की कामना की बंगाली समाज की महिलाओं ने पारंपरिक सिंदूर खेला की रस्म निभाई एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुहाग, सुख और समृद्धि की मंगलकामना की और नम आंखों से मां दुर्गा को विदाई दी आस्था का यह उत्सव भले ही मां दुर्गा की विदाई के साथ संपन्न हो गया, लेकिन भक्तों के मन में मां के प्रति श्रद्धा और विश्वास पहले की तरह अटूट है मां की विदाई के साथ हर भक्त के मन में बस एक ही भाव है ! अगले बरस मां फिर आएंगी और अपने भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देंगी,

भागलपूर से शयामानंद सिंह की रिपोर्ट ;-

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