NEWS PR डेस्क : दिव्यांगजनों को सिर्फ सरकारी योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि समान अधिकारों वाला नागरिक बनाना जरूरी है।संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत ने दिव्यांगजनों के अधिकारों और सशक्तीकरण को लेकर समावेशी व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया है। भारत ने स्पष्ट किया कि दिव्यांगजनों को केवल सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभार्थी मानने के बजाय उन्हें समान अधिकार, बेहतर अवसर और निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी दी जानी चाहिए। साथ ही, प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय संकट के दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया।
UN में संजय झा ने रखा भारत का पक्ष
संयुक्त राष्ट्र में आयोजित संवाद के दौरान परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष संजय कुमार झा ने दिव्यांगजनों के अधिकारों पर भारत का पक्ष रखा। उन्होंने ऐसी वैश्विक व्यवस्था बनाने की आवश्यकता बताई, जिसमें दिव्यांगजनों को शिक्षा, रोजगार, सार्वजनिक सेवाओं और सामाजिक गतिविधियों में समान अवसर मिल सकें। उन्होंने नीतियां तैयार करते समय दिव्यांगजनों की जरूरतों को प्राथमिकता देने और उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने पर जोर दिया।
कल्याणकारी योजनाओं से आगे बढ़कर अधिकारों पर जोर
भारत का संदेश है कि दिव्यांगजनों का सशक्तीकरण केवल आर्थिक सहायता या कल्याणकारी योजनाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्हें अपनी जिंदगी से जुड़े फैसले लेने, सार्वजनिक नीतियों पर अपनी राय रखने और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिलना जरूरी है।
समावेशी व्यवस्था के लिए सार्वजनिक स्थानों, परिवहन और सरकारी सेवाओं को सुलभ बनाना भी महत्वपूर्ण है। निर्णय लेने की प्रक्रिया में दिव्यांगजनों की भागीदारी से उनकी वास्तविक जरूरतों के अनुरूप नीतियां तैयार करने में मदद मिल सकती है।
आपदा के समय सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत
भारत ने प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय संकट के दौरान दिव्यांगजनों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही। आपातकालीन परिस्थितियों में राहत और बचाव की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसका लाभ दिव्यांगजन आसानी से उठा सकें।
इसके लिए सुलभ आपातकालीन सूचनाएं, सुरक्षित निकासी के विकल्प और उनकी जरूरतों के अनुरूप राहत शिविर जरूरी हैं। आपदा प्रबंधन की योजनाओं में दिव्यांगजनों की भागीदारी सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है।
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 का महत्व
भारत में दिव्यांगजनों के अधिकारों की रक्षा और समान अवसर सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 लागू है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र का दिव्यांगजन अधिकार अभिसमय (UNCRPD) वैश्विक स्तर पर समानता, गरिमा और समावेशन को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण आधार है।
भारत के संदेश का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों को समाज का सक्रिय और समान अधिकारों वाला हिस्सा बनाना है। इसके लिए योजनाओं के साथ सुलभ सुविधाओं, प्रभावी नीतियों और निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है।