NEWS PR डेस्क: बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान धर्मांतरण के मुद्दे पर सदन में जोरदार बहस और हंगामा देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी के विधायक वीरेंद्र कुमार ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए राज्य में कथित धर्म परिवर्तन की घटनाओं पर चिंता जताते हुए कड़ा कानून बनाने की मांग उठाई।
जनसंख्या वृद्धि के आंकड़ों का हवाला
वीरेंद्र कुमार ने सदन में दावा किया कि राज्य में धर्मांतरण के कारण मुस्लिम और ईसाई आबादी में असामान्य वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि बिहार में 5,000 से अधिक चर्च स्थापित हो चुके हैं और ईसाइयों की वृद्धि दर राष्ट्रीय स्तर की तुलना में राज्य में काफी अधिक है। सीमावर्ती जिलों में मुस्लिम आबादी में भी अप्रत्याशित वृद्धि का आरोप लगाया गया।
सरकार का जवाब: कोई कानून विचाराधीन नहीं
इस पर प्रभारी गृह मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने स्पष्ट किया कि फिलहाल राज्य सरकार के स्तर पर धर्म परिवर्तन रोकने संबंधी कोई कानून विचाराधीन नहीं है। मंत्री के इस जवाब के बाद भाजपा विधायकों ने सदन में विरोध जताया। वीरेंद्र कुमार, जीवेश मिश्रा और जनक सिंह सहित अन्य सदस्यों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए सख्त कानून की मांग दोहराई।
अन्य राज्यों का उदाहरण
भाजपा विधायकों ने कहा कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू हैं, जिनमें धोखाधड़ी, प्रलोभन या जबरन विवाह के जरिए धर्म परिवर्तन कराने पर कठोर दंड का प्रावधान है। उनका कहना था कि बिहार में भी इसी तरह का कानून बनाया जाना चाहिए।
लालगंज विधायक संजय सिंह ने सीमांचल और सीमावर्ती क्षेत्रों में धर्मांतरण की घटनाओं पर चिंता जताई। जीवेश मिश्रा ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर स्पष्टता आवश्यक है।
विपक्ष का प्रतिवाद
वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के विधायकों ने भाजपा सदस्यों के आरोपों का विरोध किया। आरजेडी विधायक आलोक मेहता ने सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया और कहा कि बिना ठोस साक्ष्य के इस तरह के दावे नहीं किए जाने चाहिए।
स्पीकर ने समीक्षा का दिया आश्वासन
विधानसभा अध्यक्ष Prem Kumar ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि होली के बाद इस विषय पर अपने कक्ष में बैठक आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो सरकार कानून बनाने पर विचार कर सकती है।
धर्मांतरण का मुद्दा सदन में राजनीतिक रूप से संवेदनशील विषय बनकर उभरा है। आने वाले दिनों में इस पर सरकार का रुख और विपक्ष की रणनीति राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकती है।