NEWS PR डेस्क: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आज शुक्रवार को बिहार दौरे का तीसरा दिन है। बुधवार को वो बिहार के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचें थे। ऐसा कहा गया था की उनका यह दौरा सीमांचल क्षेत्र पर केंद्रित रहने वाला है, जहां वे सीमावर्ती जिलों की सुरक्षा व्यवस्था और विकास कार्यों की समीक्षा करते नज़र भी आए। किसनगंज, अररिया में वे कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर सीमा सुरक्षा, घुसपैठ और प्रशासनिक तैयारियों पर विस्तृत चर्चा करते दिखे।
इसी बीच आरजेडी ने गृह मंत्री के दौरे को लेकर बड़ा दावा किया है। पार्टी के प्रधान महासचिव और विधायक रणविजय साहू ने आरोप लगाया है कि सीमांचल और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों को मिलाकर केंद्र शासित प्रदेश बनाने की तैयारी की जा रही है। उनका कहना है कि इसी मुद्दे पर निर्णय लेने के लिए अमित शाह बिहार आयें हैं . आरजेडी का दावा है कि ऐसा कदम उठाए जाने से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के वोट बैंक पर असर पड़ेगा।
बंगाल चुनाव को साधने की कोशिश: जी हाँ आरजेडी नेताओं का आरोप है कि बीजेपी ध्रुवीकरण की राजनीति के तहत घुसपैठ को मुद्दा बनाकर केंद्र शासित प्रदेश बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। उनका कहना है कि इस कदम का मकसद आगामी बंगाल चुनाव में राजनीतिक लाभ लेना हो सकता है।
बीजेपी का पलटवार:
वहीं बीजेपी ने आरजेडी के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक मिथिलेश तिवारी ने कहा कि सीमांचल क्षेत्र में घुसपैठ एक गंभीर समस्या है और इससे निपटने के लिए सख्त कदम उठाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जो भी निर्णय आवश्यक होगा, वह लिया जाएगा — चाहे वह प्रशासनिक पुनर्गठन ही क्यों न हो। उन्होंने यह भी कहा कि अमित शाह के दौरे से विपक्ष घबराया हुआ है।
दौरे को लेकर प्रशासन अलर्ट:
गृह मंत्री के बिहार पहुंचते ही सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी . पुलिस और खुफिया एजेंसियां अलर्ट मोड में हैं। अधिकारियों को विकास योजनाओं की अद्यतन रिपोर्ट तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान अमित शाह ने घुसपैठ के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा था कि हर घुसपैठिए की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में उनका यह दौरा राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टिकोण से बेहद अहम माना जा रहा है। साथ ही कुल मिलाकर, कहें तो अमित शाह का सीमांचल दौरा सुरक्षा और विकास की समीक्षा से आगे बढ़कर अब बिहार और बंगाल की सियासत में बड़े राजनीतिक संकेतों के तौर पर देखा जा रहा है।