NEWS PR डेस्क: दरभंगा, 28 अप्रैल। दरभंगा जिले में प्राचीन पांडुलिपियों की खोज और सत्यापन अभियान के दौरान एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। जिले में दुर्लभ और सैकड़ों वर्ष पुरानी पांडुलिपियों के मिलने से दरभंगा के समृद्ध इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और पौराणिक परंपराओं पर नई रोशनी पड़ी है।
जिलाधिकारी Kaushal Kumar ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पांडुलिपियों की खोज, सत्यापन और संरक्षण अभियान में तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता सुधार, बेहतर निगरानी और जनजागरूकता के माध्यम से इस अभियान को और प्रभावी बनाया जाए। साथ ही आम नागरिकों से भी इस दिशा में सहयोग की अपील की गई है।
ज्ञान भारतम् मिशन के तहत मंगलवार को राघोपुर ड्योढ़ी स्थित हरिनंदन सिंह मेमोरियल ट्रस्ट में संरक्षित पांडुलिपियों का निरीक्षण किया गया। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी चंदन कुमार ने ट्रस्ट में सुरक्षित दुर्लभ ग्रंथों का अवलोकन किया। इस दौरान ट्रस्ट संचालक रामदत्त सिंह ने इन पांडुलिपियों की ऐतिहासिक महत्ता और वर्तमान स्थिति की जानकारी दी।
निरीक्षण के दौरान लगभग 400 वर्ष पुरानी ‘अचारादर्श’, करीब 500 वर्ष पुरानी ‘काव्य प्रकाशिका’ तथा ‘अमरकोष’ पर टीका सहित ताड़पत्र पर लिखित हस्तलिखित ग्रंथ प्राप्त हुए। इन अमूल्य दस्तावेजों से दरभंगा के ऐतिहासिक और साहित्यिक वैभव को समझने का नया अवसर मिला है।
जिलाधिकारी ने बताया कि जिले में अब तक सत्यापित पांडुलिपियों की संख्या बढ़कर 24 हजार 139 से अधिक हो चुकी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि घरों में सुरक्षित 75 वर्ष से अधिक पुरानी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक और आध्यात्मिक महत्व की पांडुलिपियों को ज्ञान भारतम् पोर्टल पर साझा करें।
उन्होंने कहा कि कई बार पुराने संदूकों और अलमारियों में रखे कागजात लोगों की नजर में सामान्य होते हैं, जबकि वे इतिहास के महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित हो सकते हैं। इन पांडुलिपियों के अध्ययन से ऐसे कई तथ्य सामने आते हैं, जो अब तक अपुष्ट रहे हैं।
भारत सरकार और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास से चल रहे ज्ञान भारतम् मिशन के तहत 75 वर्ष से अधिक पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियों का डिजिटाइजेशन, संरक्षण और सर्वेक्षण किया जा रहा है, ताकि शोधार्थियों को मूल ग्रंथों तक पहुंच मिल सके। दरभंगा में जिलाधिकारी के नेतृत्व में यह अभियान तेजी से चलाया जा रहा है।