NEWS PR डेस्क: बिहार विधान सभा के अध्यक्ष Prem Kumar ने हर घर नल-जल योजना की जमीनी स्थिति को लेकर गंभीरता दिखाते हुए अपने कार्यालय कक्ष में एक उच्चस्तरीय बैठक की। यह बैठक विधायक मिथिलेश तिवारी एवं अन्य सदस्यों द्वारा दी गई ध्यानाकर्षण सूचना के आलोक में बुलाई गई थी, जिसमें योजना के रख-रखाव और संचालन में आ रही व्यापक समस्याओं को उठाया गया था।
बैठक में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के मंत्री Sanjay Kumar Singh, विभिन्न विभागों के प्रधान सचिव, सचिव एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। पंचायती राज, नगर विकास एवं आवास, राजस्व एवं भूमि सुधार तथा ऊर्जा विभाग के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।
जमीनी हकीकत: पाइप फटे, नल टूटे, कई योजनाएं बंद
विधायकों ने ध्यानाकर्षण सूचना में बताया कि राज्य के कई वार्डों में हर घर नल-जल योजना की स्थिति खराब है। पाइपलाइन फट चुकी हैं, नल क्षतिग्रस्त हैं, बिजली बिल के भुगतान के अभाव में कई योजनाएं बंद पड़ी हैं। बोरिंग और पानी टंकी की जमीन को लेकर विवाद तथा नल-जल अनुरक्षकों के मानदेय भुगतान में देरी से योजना प्रभावित हो रही है।
2016 में हुई थी शुरुआत
अधिकारियों ने बताया कि ‘सात निश्चय’ कार्यक्रम के तहत वर्ष 2016 में मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना की शुरुआत की गई थी। शहरी क्षेत्रों में योजना का दायित्व नगर विकास एवं आवास विभाग को, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) और पंचायती राज विभाग को सौंपा गया था।
राज्य के 56,447 वार्डों में PHED द्वारा 50,081 योजनाएं तथा पंचायती राज विभाग द्वारा 58,003 ग्रामीण वार्डों में 70,157 योजनाएं बनाई गईं। वर्ष 2023 में बेहतर प्रबंधन के उद्देश्य से पंचायती राज विभाग के अधीन संचालित ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं को PHED को हस्तांतरित कर दिया गया। हस्तांतरण के समय 70,157 योजनाओं में से 23,302 बंद, 31,879 आंशिक रूप से चालू और 14,976 पूर्ण रूप से चालू पाई गईं।
मरम्मत के लिए राशि अपर्याप्त
प्रति योजना प्रति वर्ष 1,08,372 रुपये संचालन, मरम्मत और अनुरक्षण के लिए स्वीकृत हैं। इसमें 54,000 रुपये पंप चालक के मानदेय और बिजली बिल भुगतान के लिए तथा 54,372 रुपये मरम्मत एवं रख-रखाव के लिए निर्धारित हैं। बैठक में यह बात सामने आई कि कई योजनाओं में निर्माण संबंधी खामियां हैं और मौजूदा मरम्मत राशि अपर्याप्त है। इस पर PHED मंत्री ने वित्त मंत्री के साथ बैठक कर अतिरिक्त संसाधन पर विचार करने की बात कही।
भूमि विवाद और बिजली भुगतान पर निर्णय
बैठक में यह तय किया गया कि जिन लोगों की जमीन पर बोरिंग या पानी टंकी स्थापित है, उन्हें अनुरक्षण के लिए उचित राशि मिलनी चाहिए। 10 दिनों के भीतर जिलावार सर्वे कर भूमि विवाद की अद्यतन स्थिति की जांच करने का निर्णय लिया गया। बिजली बिल भुगतान को लेकर अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इसके कारण कोई भी योजना बंद नहीं हुई है।
पंचायत स्तर पर तकनीकी उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश
यह भी सामने आया कि पंचायत समिति की बैठकों में विभागीय तकनीकी अधिकारी उपस्थित नहीं रहते, जिससे स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
जनप्रतिनिधियों से मांगी जाएगी रिपोर्ट
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि राज्य के सभी विधायक अपने-अपने क्षेत्र की हर घर नल-जल योजना से जुड़ी शिकायतें विभाग को उपलब्ध कराएंगे। मंत्री स्वयं जिलावार समीक्षा बैठक कर समस्याओं के समाधान की निगरानी करेंगे।
बैठक में मिथिलेश तिवारी, विनय कुमार चौधरी, रणधीर कुमार सिंह, राजू तिवारी, सुभाष सिंह, कुमार सर्वजीत, ज्योति देवी और राहुल कुमार सहित कई विधायक मौजूद थे। साथ ही विभिन्न विभागों के प्रधान सचिव और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
आपको बता दें कि हर घर नल-जल योजना राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक है। ऐसे में विधानसभा स्तर पर इसकी समीक्षा और समस्याओं के समाधान के लिए उठाए गए कदमों को ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।