NEWS PR डेस्क: पटना, 07 मई। बिहार की राजनीति में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार हुआ। राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में कुल 32 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली। इस विस्तार की सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के मंत्रिमंडल में शामिल होने को लेकर रही।
नई कैबिनेट में सहयोगी दलों के बीच संतुलन साधने की कोशिश साफ दिखाई दी। मंत्रिमंडल में भाजपा के 15, जदयू के 13, एलजेपी (रामविलास) के 2, हम के 1 और आरएलएम के 1 विधायक को जगह दी गई है। इससे एनडीए ने आगामी राजनीतिक चुनौतियों से पहले सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने का संकेत दिया है।

इस बार के मंत्रिमंडल विस्तार की एक खास बात यह भी रही कि इसमें बिहार के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के परिवार से जुड़े चेहरे शामिल हुए। निशांत कुमार के अलावा संतोष कुमार सुमन को भी कैबिनेट में स्थान मिला, जिनके पिता जीतन राम मांझी रह चुके हैं। वहीं नीतीश मिश्रा भी मंत्री बने हैं, जिनके पिता जगन्नाथ मिश्रा तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे।
मंत्रिमंडल विस्तार में कुछ बड़े चेहरों की छुट्टी भी चर्चा में रही। भाजपा के वरिष्ठ नेता मंगल पांडेय को इस बार मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में पार्टी संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाने के बावजूद उन्हें नई टीम में शामिल नहीं किया गया। इनके अलावा सुरेंद्र मेहता और नारायण प्रसाद की भी कैबिनेट में वापसी नहीं हो सकी।

शपथ ग्रहण समारोह में राष्ट्रीय राजनीति की कई बड़ी हस्तियां मौजूद रहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने समारोह में हिस्सा लिया। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, राजीव रंजन सिंह, उपेंद्र कुशवाहा समेत कई दिग्गज नेता भी मौजूद रहे।
नई कैबिनेट के गठन के साथ अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सम्राट चौधरी की टीम बिहार में विकास, सामाजिक संतुलन और राजनीतिक स्थिरता के मोर्चे पर कितना असर छोड़ पाती है।