NEWS PR डेस्क: पटना,11 मई। बिहार सरकार जमीन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को पारदर्शी और विवादमुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। नई व्यवस्था के तहत अब जमीन खरीदने से पहले खरीदार संबंधित अंचलाधिकारी (CO) से उस जमीन की विस्तृत जांच रिपोर्ट प्राप्त कर सकेगा। इससे लोगों को रजिस्ट्री से पहले ही जमीन की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल जाएगी और धोखाधड़ी की घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
सरकार की ओर से यह नई सुविधा 15 मई से वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में लागू की जाएगी। यानी इच्छुक खरीदार जमीन की रजिस्ट्री कराने से पहले उसकी आधिकारिक जांच करवा सकेंगे। इस संबंध में उपनिबंधन महानिरीक्षक कार्यालय ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

अब तक जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया में मुख्य रूप से दस्तावेजों और रैयत से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जाती थी। लेकिन कई मामलों में बाद में पता चलता था कि जमीन पर विवाद चल रहा है, वह सरकारी भूमि है, पहले किसी और को बेची जा चुकी है या उस पर बैंक ऋण बकाया है। ऐसी स्थिति में खरीदारों को कानूनी और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
नई प्रणाली लागू होने के बाद खरीदार को जमीन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां पहले ही उपलब्ध हो जाएंगी। इसमें जमीन के वास्तविक मालिक का विवरण, सरकारी या निजी भूमि की स्थिति, पूर्व में हुई बिक्री, बैंक ऋण या बंधक की जानकारी, मुआवजा भुगतान की स्थिति और जमीन पर वास्तविक कब्जा किसका है, जैसी बातें शामिल होंगी। इसके अलावा यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि जमीन पर शांतिपूर्ण दखल है या नहीं। इससे खरीदार को यह तय करने में आसानी होगी कि संबंधित जमीन खरीदना सुरक्षित है या नहीं।

राज्य सरकार का मानना है कि इस पहल से फर्जी दस्तावेजों और अवैध तरीके से जमीन बेचने के मामलों में कमी आएगी। अक्सर लोग गलत जानकारी देकर जमीन बेच देते हैं और बाद में खरीदार वर्षों तक कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाते रहते हैं। नई जांच व्यवस्था से ऐसे विवादों को काफी हद तक रोका जा सकेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि जमीन खरीदना आम आदमी के जीवन का सबसे बड़ा निवेश होता है। ऐसे में सरकार की यह पहल लोगों को सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से संपत्ति खरीदने में मदद करेगी। साथ ही रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज और अन्य राजस्व प्रक्रियाओं को भी आसान बनाने में यह व्यवस्था अहम भूमिका निभा सकती है।