जनसंख्या नहीं, सोच बदलें: मांझी का बयान बना चर्चा का विषय

Every child is not a burden, but a possibility – Manjhi's message

Rashmi Tiwari
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गया: जनसंख्या वृद्धि को लेकर देश में चल रही बहस के बीच केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने एक बड़ा बयान दिया है। एक सवाल के जवाब में जीतन राम मांझी ने कहा कि लोगों को जनसंख्या बढ़ाने या बच्चा पैदा करने के मामले में संकीर्ण सोच नहीं रखनी चाहिए। उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि कोई भी बच्चा “पेट लेकर नहीं, बल्कि हाथ और मस्तिष्क लेकर पैदा होता है।” उनका कहना था कि यह कहना मुश्किल है कि कौन बच्चा आगे चलकर कितना बड़ा व्यक्ति बनेगा।
रोजगार और शिक्षा पर दिया जोर
जीतन राम मांझी ने साफ किया कि असली जरूरत जनसंख्या रोकने की नहीं, बल्कि रोजगार और शिक्षा बढ़ाने की है।उन्होंने कहा कि अगर समाज ईमानदारी से चले और पर्याप्त रोजगार पैदा किए जाएं, तो हर व्यक्ति का भरण-पोषण संभव है।यह बयान उस समय आया जब धीरेंद्र शास्त्री द्वारा नागपुर में दिए गए बयान—जिसमें हिंदुओं से चार बच्चे पैदा करने की अपील की गई थी—पर उनसे प्रतिक्रिया मांगी गई थी।
इतिहास का हवाला देकर दिया तर्क
मांझी ने अपने बयान में ऐतिहासिक और पौराणिक संदर्भ भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि एक समय भारत में “60 करोड़ देवता और 60 करोड़ यदुवंशी” थे, और उस दौर में भारत को ‘जगतगुरु’ कहा जाता था। उस समय जनसंख्या पर कोई रोक नहीं थी।हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे सीधे तौर पर जनसंख्या बढ़ाने की वकालत नहीं कर रहे हैं। उनके अनुसार, अगर जनसंख्या बढ़ती है तो उसे शिक्षित और सक्षम बनाना जरूरी है, ताकि लोग उद्यमी बन सकें और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण हो।
क्यों अहम है यह बयान?
बता दें कि मांझी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में जनसंख्या नियंत्रण, संसाधनों और रोजगार को लेकर लगातार बहस जारी है। ऐसे में उनका यह नजरिया राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नई चर्चा को जन्म दे सकता है।
गया से आशिष कुमार की रिपोर्ट

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