NEWSPR DESK- नीयम के अनुसार आधार या दूसरे पहचान पत्र के जरिए ही कोरोना का टीका दिया जाना है। पर कैदियों को टीका लगाने की राह में यही पहचान पत्र रोड़ा बनता जा रहा हैं। कैदियों के पास या तो पहचान पत्र नहीं है या वे देना नहीं चाहते। जेल प्रशासन मजबूर हो गये हैं की बगैर पहचान पत्र आखिर उन्हें टीका दिलाए कैसे?
ऐसे में उनके टीकाकरण के लिए जेल प्रशासन को काफी समस्याओ का सामना करना पड़ रही है। हालांकि जेल प्रशासन का प्रयास अब रंग लाने लगा है। कैदी धीरे-धीरे ही सही पर टीका लगाने के लिए पहचान पत्र देने को तैयार हो रहे हैं।
अबतक एक हजार कैदियों को लगा टीका..
बिहार के जेलों में इस वक्त करीब 55 हजार कैदी हैं। इनमें विचाराधीन और सजायाफ्ता दोनों शामिल हैं। अनुमान के मुताबिक 45 वर्ष से ऊपर के कैदियों की संख्या करीब आधी है। ऐसे में प्रथम चरण में 27 हजार के आसपास कैदियों को टीका दिया जाना है।
सूत्रों के मुताबिक वैध पहचान पत्र नहीं होने के चलते 20 दिन में करीब एक हजार कैदियों को ही टीका लग पाया है। हालांकि कारा प्रशासन की पहल के बाद इसमें जल्द इजाफा होने की उम्मीद है। आईजी कारा एवं सुधार सेवाएं मिथिलेश मिश्र खुद इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। जरूरत के मुताबिक अधीक्षक और उपाधीक्षकों को दिशा-निर्देश भी दिए जा रहे हैं।
45 पार के कैदियों को लग रहा है टीका
केन्द्र सरकार के गाइडलाइन के तहत अभी 45 वर्ष से ऊपर के लोगों को टीका दिया जा रहा है। इसे देखते हुए 45 पार के कैदियों का टीकाकरण अप्रैल से शुरू किया गया था। पर इसकी रफ्तार बहुत धीमी है। इसकी बड़ी वजह कैदियों के पास आधार कार्ड या दूसरा वैध पहचान पत्र नहीं होना है।
कई कैदियों के पास यह उपलब्ध नहीं है। वहीं कैदियों की बड़ी संख्या ऐसे भी है जो घर से इसे मंगाना भी नहीं चाहता। टीकाकरण के लिए आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र आदि का होना जरूरत है। पहचान पत्र के जरिए पहले कोविन पोर्टल पर पंजीयन होता है इसके बाद टीका लगाया जाता है।