बिहार में सत्ता परिवर्तन की उलटी गिनती! नीतीश आउट, नया सीएम इन? अगले 72 घंटे में बड़ा फैसला

Asha Rai

NEWS PR डेस्क: बिहार की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से चल रहा सस्पेंस अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। लंबे समय से सत्ता के केंद्र में रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में दाखिल इस नामांकन के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि नीतीश कुमार जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। करीब दो दशकों तक बिहार की राजनीति पर प्रभाव रखने वाले नीतीश अब राज्य की सक्रिय राजनीति से हटकर राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं।

इस बीच जेडीयू की हाई-प्रोफाइल बैठक ने सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया को लगभग अंतिम रूप दे दिया है। पार्टी के सांसदों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं की बैठक में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर लंबी चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक बैठक में इस बात पर सहमति बनती दिखी कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को जेडीयू विधायक दल का नेता चुना जा सकता है। हालांकि अभी इसकी औपचारिक घोषणा बाकी है, लेकिन पार्टी के भीतर इसे लेकर माहौल लगभग तैयार माना जा रहा है।

दरअसल होली के बाद शुरू हुई राजनीतिक हलचल ने अब बड़ा मोड़ ले लिया है। गुरुवार को पटना में राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे हैं कि नीतीश कुमार जल्द ही राजभवन जाकर अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं। जेडीयू के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार अगले एक सप्ताह के भीतर यह प्रक्रिया पूरी हो सकती है, जिसके बाद राज्य में नई सरकार के गठन की कवायद तेज हो जाएगी।

पार्टी सूत्रों का यह भी कहना है कि निशांत कुमार जल्द ही जेडीयू की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। इसके बाद उन्हें विधायक दल का नेता चुना जा सकता है। यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि नीतीश कुमार लंबे समय से परिवारवाद के खिलाफ अपनी स्पष्ट राय रखते रहे हैं। लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और उनके स्वास्थ्य को देखते हुए पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि संगठन को एकजुट रखने के लिए निशांत कुमार एक स्वीकार्य चेहरा हो सकते हैं। नई सरकार बनने के बाद उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की भी चर्चा है।

इस पूरे राजनीतिक समीकरण में भारतीय जनता पार्टी की भूमिका भी बेहद अहम मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की एक बड़ी शर्त यह है कि बिहार में मुख्यमंत्री पद अब बीजेपी को दिया जाए। 2025 के विधानसभा चुनाव में एनडीए की मजबूत जीत और बीजेपी के बेहतर प्रदर्शन के बाद पार्टी राज्य में अपना मुख्यमंत्री चाहती है। मौजूदा विधानसभा में बीजेपी के पास 89 विधायक हैं, जबकि जेडीयू के पास 85 विधायक हैं। ऐसे में बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है।

बीजेपी की ओर से संभावित मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी और नित्यानंद राय के नाम सबसे आगे बताए जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इनमें से किसी एक को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। इसके साथ ही सत्ता संतुलन बनाए रखने के लिए दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना भी जताई जा रही है, जिनमें एक जेडीयू से और दूसरा बीजेपी से हो सकता है।

हालांकि सत्ता से हटने के बाद भी नीतीश कुमार की भूमिका पूरी तरह खत्म नहीं होगी। राज्यसभा सदस्य बनने के बाद वे केंद्र और बिहार के बीच एक मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकते हैं। एनडीए के भीतर उन्हें एक अनुभवी और संतुलित नेता के रूप में देखा जाता है, इसलिए माना जा रहा है कि वे राजनीतिक दिशा देने में सक्रिय रहेंगे।

सूत्रों के मुताबिक नीतीश कुमार का इस्तीफा राज्यसभा चुनाव के औपचारिक परिणाम आने से पहले ही हो सकता है। माना जा रहा है कि 10 अप्रैल से पहले यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। फिलहाल बिहार की राजनीति के लिए आने वाले 72 घंटे बेहद अहम माने जा रहे हैं। इसी दौरान नए मुख्यमंत्री के नाम और कैबिनेट के स्वरूप पर अंतिम फैसला हो सकता है।

वहीं विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठा रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह जनादेश का अपमान है और सत्ता की राजनीति का उदाहरण है। हालांकि एनडीए के पास विधानसभा में मजबूत बहुमत है, इसलिए सरकार की स्थिरता पर फिलहाल कोई बड़ा खतरा नजर नहीं आता।

कुल मिलाकर बिहार की राजनीति इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक हुआ तो आने वाले दिनों में राज्य को नया मुख्यमंत्री मिलेगा और नीतीश कुमार नई राजनीतिक भूमिका में दिखाई देंगे। यही वजह है कि बिहार की राजनीति में अगले 72 घंटे बेहद निर्णायक माने जा रहे हैं।

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