कालाबाजारी पर कड़ा प्रहार: 47 उर्वरक दुकानों पर केस, 124 के लाइसेंस रद्द

Amit Singh

NEWS PR डेस्क: रबी मौसम में किसानों को खाद की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने उर्वरक की कालाबाजारी और जमाखोरी के खिलाफ व्यापक अभियान छेड़ दिया है। कार्रवाई के तहत अब तक 47 उर्वरक प्रतिष्ठानों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है, जबकि 124 दुकानों का उर्वरक प्राधिकार पत्र रद्द कर दिया गया है।

कालाबाजारी पर कड़ा प्रहार

कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि अधिक कीमत पर बिक्री, जमाखोरी या कालाबाजारी में संलिप्त पाए जाने वाले किसी भी प्रतिष्ठान को बख्शा नहीं जाएगा। विभागीय स्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है और जिलों को नियमित जांच के निर्देश दिए गए हैं। सरकार की मंशा है कि किसानों को निर्धारित दर पर ही खाद उपलब्ध हो।

पर्याप्त भंडारण का दावा

कार्रवाई के बीच सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया है कि राज्य में खाद की कोई कमी नहीं है। वर्तमान में राज्य में

1.60 लाख मीट्रिक टन यूरिया

1.45 लाख मीट्रिक टन डीएपी

2.06 लाख मीट्रिक टन एनपीके

0.43 लाख मीट्रिक टन एमओपी

1.05 लाख मीट्रिक टन एसएसपी

का भंडारण उपलब्ध है। विभाग का कहना है कि यह मात्रा किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।

फ्लाइंग स्क्वॉड और विशेष छापेमारी

उर्वरक आपूर्ति एवं वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें शिकायत मिलने पर त्वरित छापेमारी करेंगी। कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने जिलों में विशेष जांच दल गठित कर नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए हैं। अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे जिलों में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के साथ समन्वय स्थापित कर उर्वरक तस्करी रोकने के लिए विशेष अभियान चलाने को भी कहा गया है।

जबरन टैगिंग पर जीरो टॉलरेंस

राज्य सरकार ने उर्वरक कंपनियों द्वारा खुदरा विक्रेताओं पर अनुदानित खाद के साथ अन्य उत्पादों की जबरन टैगिंग को गंभीर अनियमितता माना है। कृषि विभाग ने स्पष्ट आदेश जारी कर कहा है कि यूरिया, डीएपी, एनपीके और एमओपी जैसे अनुदानित उर्वरकों के साथ किसी भी अन्य उत्पाद की बाध्यकारी बिक्री नियमों का उल्लंघन है।

जीरो टॉलरेंस नीति के तहत ऐसी गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि सघन अभियान का उद्देश्य बाजार में पारदर्शिता लाना और किसानों को उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराना है, ताकि रबी फसलों की बुआई और उत्पादन पर कोई असर न पड़े।

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