महंगाई का डबल झटका: बासमती चावल, रसोई गैस और पेट्रोल-डीजल के बढ़ेंगे दाम, बजट पर पड़ेगा असर

Neha Nanhe

NEWS PR डेस्क : ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण हॉर्मुज जलसंधि में हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। इसका सीधा असर भारत पर पड़ सकता है, क्योंकि कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने से पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका है। वहीं, ईरान को भेजा जाने वाला बासमती चावल का निर्यात बाधित होने से किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। कुल मिलाकर यह स्थिति भारत की अर्थव्यवस्था और बढ़ती महंगाई के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है।

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए हमलों ने पश्चिम एशिया को फिर से युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है। यह टकराव केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। हजारों किलोमीटर दूर चल रही यह जंग भारत के आम नागरिक की जेब तक असर डाल सकती है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य: ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा पर संकट

ओमान और ईरान के बीच स्थित हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर करीब 20% कच्चा तेल और एलएनजी इसी रास्ते से गुजरता है।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल आयात करता है और इसके प्रमुख आपूर्तिकर्ता — इराक, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात — इसी मार्ग से तेल भेजते हैं।
यदि ईरान इस समुद्री रास्ते को बाधित करता है या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो भारत की सप्लाई चेन पर सीधा असर पड़ेगा।

तेल महंगा तो अर्थव्यवस्था पर दबाव

विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत का आयात बिल 13-14 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है। इससे डॉलर की मांग बढ़ेगी, रुपया कमजोर होगा और आयातित महंगाई तेज होगी।
डीजल की कीमत बढ़ने से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिसका असर सब्जियों, फलों और रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर दिखेगा।

रसोई गैस पर असर

भारत बड़ी मात्रा में एलपीजी भी इसी क्षेत्र से मंगाता है। अंतरराष्ट्रीय क्रूड कीमतें बढ़ने पर सरकार की सब्सिडी का बोझ बढ़ सकता है। फिलहाल उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की जा रही है, लेकिन अगर तनाव लंबा खिंचता है तो घरेलू बजट पर दबाव बढ़ना तय है।

कृषि निर्यात भी प्रभावित

यह संकट सिर्फ ऊर्जा तक सीमित नहीं है।
भारत के बासमती चावल का बड़ा हिस्सा ईरान को निर्यात होता है। यदि भुगतान तंत्र या शिपिंग व्यवस्था प्रभावित होती है, तो किसानों और निर्यातकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। चाय निर्यात पर भी असर पड़ने की आशंका है, जिससे व्यापारिक गतिविधियां धीमी हो सकती हैं।

सरकार की तैयारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक बुलाई है।
सरकार सामरिक तेल भंडार की स्थिति की समीक्षा कर रही है और वैकल्पिक आपूर्ति के लिए रूस, अमेरिका और अफ्रीकी देशों के साथ विकल्प तलाशे जा रहे हैं।
साथ ही खाड़ी देशों में रह रहे करीब 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा भी सर्वोच्च प्राथमिकता में है।

कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया का यह तनाव भारत के लिए सिर्फ कूटनीतिक चुनौती नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक परीक्षा भी बन सकता है।

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