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दशहरा: कलश स्थापन के साथ 26 से नवरात्र, 5 अक्टूबर को दशहरा

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NEWSPR डेस्क। शारदीय नवरात्र 26 सितंबर से सिद्ध योग में आरंभ होगा। उसी दिन कलश स्थापन होगा। कलश स्थापन का शुभ मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त से सूर्यास्त तक है। लेकिन मां की प्रतिमा स्थापित करने वाले भक्तों के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:36 से दोपहर 12:24 तक है। इसबार मां जगदंबा का आगमन और गमन हाथी पर होगा। ऐसा संयोग कई साल बाद वना है। हाथी पर माता के आगमन और गमन का मतलब है अच्छी बारिश होगी। इससे खेती अच्छी होगी और किसानों को उन्नति होगी। साथ ही समाज में सर्वत्र शांति और समृद्धि आएगी। 5 अक्टूबर को विजयदशमी के साथ नवरात्र संपन्न होगा। देवी भागवत पुराण में नवरात्र के मौके पर माता की सवारी का विशेष महत्व बताया गया है। हर साल अलग-अलग वाहन पर सवार होकर आती हैं।

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मां का हर वाहन विशेष संदेश देता है। पुराणों में वर्णित है कि जब नवरात्र की शुरुआत रविवार या सोमवार से होती है, तब माता का आगमन हाथी पर होता है। आचार्य सुजीत शास्त्री (मिट्ठू बाबा) के अनुसार मां दुर्गा के पूजन का विधान सदियों से प्रचलित है। किसी भी कार्य को करने में शक्ति की आवश्यकता होती है। बिना शक्ति के कोई एक भी पग नहीं चल सकता है। इसलिए शक्ति संजोने के लिए चार नवरात्र में शारदीय नवरात्र का विशेष महत्व है। कलयुग में मां भगवती और शिव का पूजन करने से सभी विघ्न-बाधाओं, क्लेश, दुख- दरिद्रता आदि से मुक्ति तो मिलती ही है, साथ ही परम पद प्राप्त होता है। जो दुर्गम और दुष्कर कार्य से मुक्ति दिला दें।

 

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