NEWS PR डेस्क: पटना, 30 अप्रैल। बिहार सरकार ने राज्य में पत्थर खनन व्यवस्था को पारदर्शी और संगठित बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब चयनित जिलों में सर्वेक्षण के बाद पत्थर खनन पट्टों की बंदोबस्ती ई-नीलामी के माध्यम से की जाएगी। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य खनन क्षेत्र में पारदर्शिता लाना, राजस्व बढ़ाना और निर्माण कार्यों के लिए सस्ती सामग्री उपलब्ध कराना है।
सरकार ने ई-नीलामी प्रक्रिया को संचालित करने की जिम्मेदारी Metal Scrap Trade Corporation (MSTC) को सौंपी है। यह संस्था ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए निष्पक्ष और पारदर्शी नीलामी सुनिश्चित करेगी, जिससे खनन पट्टों के आवंटन में किसी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश कम होगी।
खान एवं भू-तत्व विभाग के अनुसार, फिलहाल बिहार को स्टोन चिप्स और पत्थर के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है। राज्य में लंबे समय से खनन गतिविधियों पर रोक इसका प्रमुख कारण रही है। अब करीब सात जिलों में सर्वेक्षण पूरा होने के बाद खनन शुरू करने का प्रस्ताव स्वीकृत कर दिया गया है।
सरकार को उम्मीद है कि इस फैसले से राज्य में चल रही सड़कों, पुलों और अन्य आधारभूत परियोजनाओं को गति मिलेगी। स्थानीय स्तर पर पत्थर उपलब्ध होने से निर्माण लागत घटेगी और परियोजनाएं समय पर पूरी हो सकेंगी।
इसके साथ ही, खनन पट्टों की व्यवस्थित और पारदर्शी नीलामी से सरकारी राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। अब तक अवैध खनन और असंगठित प्रक्रियाओं के कारण राजस्व का नुकसान होता रहा है, जिसे यह नई प्रणाली काफी हद तक रोकने में मदद करेगी। यह पहल रोजगार के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खनन गतिविधियों के शुरू होने से स्थानीय लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।