NEWS PR डेस्क : चुनाव आयोग ने बिहार कैडर के 44 वरिष्ठ IAS अधिकारियों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। इन अधिकारियों को केंद्रीय चुनाव प्रेक्षक के तौर पर नियुक्त किया गया है। ये अफसर असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों के दौरान तैनात रहेंगे और वहां निष्पक्ष एवं पारदर्शी मतदान प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।
इस सूची में 20 से अधिक विभागों के सचिव शामिल हैं, जिनका करीब दो महीने तक बिहार से बाहर रहना राज्य के प्रशासनिक कामकाज को प्रभावित कर सकता है। चुनाव ड्यूटी से पहले आयोग ने सभी अधिकारियों को दिल्ली बुलाकर आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए हैं।
बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारियों को एक साथ राष्ट्रीय स्तर की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। चुनाव आयोग ने बिहार कैडर के 44 IAS अधिकारियों को केंद्रीय चुनाव प्रेक्षक के रूप में तैनात करने का निर्णय लिया है। इस सूची में 20 विभागों के सचिव भी शामिल हैं। इन अधिकारियों को चुनावी ड्यूटी से पहले 5 फरवरी को दिल्ली बुलाकर विशेष ब्रीफिंग दी गई, जहां आयोग ने उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश सौंपे।
क्यों बिहार कैडर के अधिकारियों पर भरोसा
चुनाव आयोग के अनुसार, बिहार कैडर के अधिकारियों को चुनाव संचालन कानून-व्यवस्था संभालनेऔर निष्पक्ष प्रशासन लागू करनेका व्यापक अनुभव है। इसी कारण इन्हें उन राज्यों में भेजा जा रहा है, जहां विधानसभा चुनाव या उपचुनाव प्रस्तावित हैं, ताकि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह स्वच्छ, निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे
इन राज्यों में संभालेंगे चुनावी मोर्चा
फरवरी से मार्च के बीच असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन चुनावों के दौरान बिहार कैडर के ये अधिकारी केंद्रीय चुनाव प्रेक्षक के तौर पर तैनात रहेंगे। उनकी मुख्य जिम्मेदारी होगी कि पूरी चुनावी प्रक्रिया राजनीतिक दबाव से मुक्त रहे और धनबल व बाहुबल के इस्तेमाल पर सख्त निगरानी रखी जाए।
दो महीने तक बिहार से बाहर रहेंगे वरिष्ठ अधिकारी
करीब दो महीने तक बड़ी संख्या में वरिष्ठ अफसरों का राज्य से बाहर रहना बिहार के प्रशासनिक ढांचे पर असर डाल सकता है।विशेष रूप से 20 से अधिक विभागों के सचिवों की गैरमौजूदगी में ,नीतिगत निर्णयों और बड़े विकास प्रोजेक्ट्स की रफ्तारधीमी पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
तबादले पर रोक, अस्थायी व्यवस्था से चलेगा काम
चुनाव ड्यूटी पर तैनात किए गए अधिकारियों का इस अवधि में तबादला नहीं किया जाएगा। उनकी अनुपस्थिति में संबंधित विभागों की जिम्मेदारी अन्य अधिकारियों को अस्थायी प्रभार के रूप में दी जाएगी। हालांकि, इस व्यवस्था में आमतौर पर रोजमर्रा के कार्य निपटाए जाते हैं जबकि अहम नीतिगत फैसले अधिकारियों की वापसी तक टाल दिए जाते हैं।
किन विभागों के सचिव बने केंद्रीय प्रेक्षक
योजना एवं विकास, वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, नगर विकास, ग्रामीण कार्य, समाज कल्याण, राजस्व, सहकारिता और पंचायती राज जैसे महत्वपूर्ण विभागों के सचिवों को चुनाव आयोग ने यह जिम्मेदारी सौंपी है। इनमें मयंक वरवड़े, रचना पाटिल, लोकेश कुमार सिंह, दिनेश कुमार, पंकज पाल और बंदना प्रेयषी जैसे वरिष्ठ IAS अधिकारी शामिल हैं। सचिव ही नहीं, बोर्ड और निगम प्रमुख भी सूची में सिर्फ सचिव स्तर के अधिकारी ही नहीं, बल्कि मंडल आयुक्त विभागीय निदेशक सार्वजनिक उपक्रमों के एमडी और विशेष सचिव स्तर के अधिकारी भी केंद्रीय चुनाव प्रेक्षक बनाए गए हैं। इससे स्पष्ट है कि चुनाव आयोग ने अनुभव और प्रशासनिक दक्षता को प्राथमिकता दी है।
बिहार सरकार के सामने दोहरी जिम्मेदारी हैं एक ओर राज्य सरकार को बिहार में प्रशासनिक कामकाज को सुचारु बनाए रखना है,तो दूसरी ओर उसके वरिष्ठ अधिकारी देश के अलग-अलग राज्यों में लोकतंत्र की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभायेगे | यह फैसला जहां बिहार कैडर की विश्वसनीयता को और मजबूत करता है, वहीं राज्य प्रशासन के लिए संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती भी बनकर सामने आया है।
केंद्रीय चुनाव प्रेक्षक की ड्यूटी पर जाने वाले प्रमुख सचिव
योजना एवं विकास विभाग के प्रधान सचिव मयंक वरवड़े,विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव प्रतिमा सतीश वर्मा,लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के सचिव पंकज पाल,समाज कल्याण विभाग की सचिव बंदना प्रेयषी,और स्वास्थ्य विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह को यह जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह, ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव दिवेश सेहत, नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव संदीप पुडकलवट्टी,सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव गोपाल मीणा भी सूची में हैं।
अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी चुनावी जिम्मेदारी
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह,पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार,श्रम संसाधन विभाग के सचिव दीपक आनंद,वाणिज्यकर विभाग के सचिव संजय कुमार सिंह और शिक्षा विभाग के सचिव दिनेश कुमार को भी केंद्रीय प्रेक्षक बनाया गया है।अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सचिव मो. सोहैल,लघु संसाधन विभाग के सचिव बी. कार्तिकेय धनजी,ऊर्जा विभाग के सचिव मनोज कुमार सिंह,योजना एवं विकास विभाग के सचिव कंवल तनुजऔर वित्त विभाग की सचिव रचना पाटिल भी इस सूची में शामिल हैं। निगम, बोर्ड और विशेष पदों पर तैनात अधिकारी भी शामिल पदस्थापन की प्रतीक्षा में रहे सरवणन एम.,राजस्व पर्षद की अपर सदस्य आशिमा जैन,तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह,एनबीपीडीसीएल के एमडी राहुल कुमार और जीविका के सीईओ हिमांशु शर्मा को भी केंद्रीय चुनाव प्रेक्षक की जिम्मेदारी मिली है।इसके साथ हीपथ विकास निगम के एमडी शीर्षत कपिल,पशुपालन
निदेशक उज्जवल सिंह,बीआईआईडीसी के एमडी इनायत खान,पीएचईडी के विशेष सचिव संजीव कुमार और श्रम संसाधन विभाग के विशेष सचिव सुनील यादव भी चुनाव ड्यूटी निभाएंगे।
सूची में और भी नाम
पथ निर्माण विभाग की विशेष सचिव शैलजा शर्मा,वित्त विभाग के संयुक्त सचिव जितेंद्र गुप्ता,तकनीकी सेवा आयोग के विशेष सचिव अरुणाभ वर्मा,और पंचायती राज निदेशक नवीन कुमार सिंह को भी यह जिम्मेदारी दी गई है।भू-अर्जन निदेशक कमलेश कुमार सिंह,आवास बोर्ड के एमडी राजीव श्रीवास्तव,कृषि विभाग के विशेष सचिव शैलेंद्र कुमार,वित्त विभाग के विशेष सचिव महावीर शर्मा और योजना एवं विकास विभाग के अपर सचिव रंजीत कुमार भी सूची में शामिल हैं।अंत में भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशक सुहर्ष भगत,निर्वाचन विभाग के अपर सीईओ प्रशांत कुमार,और शिक्षा विभाग के अपर सचिव सज्जन आर.
को केंद्रीय चुनाव प्रेक्षक नियुक्त किया गया है।