NEWS PR डेस्क: पटना, 21 मार्च। बिहार में सरकारी विभागों में होने वाली निविदा (टेंडर) प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने बड़ा कदम उठाया है। अब सभी विभागों के टेंडरों की निगरानी EOU करेगी। इसके लिए एसपी के मार्गदर्शन में पांच सदस्यीय विशेष जांच टीम का गठन किया गया है।
पुलिस मुख्यालय स्थित सरदार पटेल भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में EOU के एसपी पंकज कुमार ने बताया कि विभिन्न विभागों में टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसी को देखते हुए पहली बार इस तरह की मॉनिटरिंग व्यवस्था लागू की गई है, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता पर रोक लगाई जा सके।
उन्होंने बताया कि अवैध खनन से जुड़े मामलों की जांच राज्य के 17 जिलों में चल रही है। जांच के दौरान यह सामने आया कि खनन सॉफ्टवेयर में OTP प्रमाणीकरण की अनदेखी कर कई कंपनियों को गलत तरीके से मान्यता दी गई, जिससे करीब 325 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। इस मामले में अब तक 62 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं।
एसपी ने यह भी जानकारी दी कि जनवरी से मार्च के बीच अवैध संपत्ति से जुड़े 21 करोड़ रुपये के दो मामलों को प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सौंपा गया है, जहां मनी लॉन्ड्रिंग कानून (PMLA) के तहत कार्रवाई की जाएगी।
सहकारिता क्षेत्र में भी बड़े घोटाले की जांच जारी है। वैशाली सहकारिता बैंक और आवामी लीग से जुड़े 101 करोड़ रुपये के मामले में अब तक कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। मुख्य आरोपी बीएसएनएल कर्मी संतोष कुमार को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अन्य आरोपियों को पहले ही पकड़ा जा चुका है। वहीं, 12 साल से फरार एक सब-पोस्टमास्टर को भी हाल ही में गिरफ्तार किया गया है।
फर्जी ई-वे बिल के जरिए कोयला तस्करी के मामले में भी कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को सीवान से गिरफ्तार किया गया है, जिसने करीब 35 लाख रुपये के राजस्व की चोरी की थी।
इसके अलावा आय से अधिक संपत्ति के मामले में ऊर्जा विभाग के कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार रजक के खिलाफ केस दर्ज कर सात ठिकानों पर छापेमारी की गई। जांच में जमीन के कागजात, जेवरात और नेपाल में संपत्ति से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए हैं।
प्रेस वार्ता में यह भी बताया गया कि एससीईआरटी परीक्षा पेपर लीक मामले के मुख्य आरोपी सरफराज उर्फ जन्नत भईया को गिरफ्तार किया गया है। वह यूट्यूब चैनल के जरिए प्रश्नपत्र हल कर अपलोड करता था और लोगों से पैसे लेकर यह अवैध काम करता था।
EOU की इस सख्ती को बिहार में भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराधों पर बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में टेंडर प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी होने की उम्मीद है।