NEWS PR डेस्क : केंद्र की मोदी सरकार ने बिहार के जलाशयों में गंगाजल पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने इस परियोजना के शुरुआती प्रस्ताव (PPR) को हरी झंडी दी है। पहले चरण में 132 किमी लंबी पाइपलाइन के माध्यम से लखीसराय, जमुई और मुंगेर के छह प्रमुख जलाशयों को गंगाजल से भरा जाएगा, जिससे सिंचाई और भूजल संकट को कम करने में मदद मिलेगी।
बिहार में जल संकट दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के सूखे जलाशयों को जीवनदान देने के उद्देश्य से ‘गंगाजल आपूर्ति योजना’ को मंजूरी दे दी गई है। इस योजना के तहत मानसून में गंगा के अतिरिक्त जल को पाइपलाइनों के जरिए दक्षिण बिहार के जलाशयों तक पहुँचाया जाएगा।
अब जल संसाधन विभाग इस योजना को लागू करने की तैयारी में है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) अगले दो-तीन महीनों में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इस पहल से नवादा, लखीसराय, जमुई और मुंगेर जैसे जिलों में सूखे की समस्या कम होगी और बड़ी संख्या में कृषि योग्य भूमि की सिंचाई सुनिश्चित की जा सकेगी।
योजना के पहले चरण में बिहार के कुल 23 जलाशयों में से 6 प्रमुख जलाशयों को शामिल किया गया है। इनमें लखीसराय के बासकुंड और मोरवे, जमुई के अमृत श्रीखंडी, आंजन और गरही, तथा मुंगेर का जालकुंड शामिल हैं। इन जलाशयों तक गंगाजल पहुंचाने के लिए कुल 132 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी।
जलाशयों में पूरे साल पानी उपलब्ध रहने से किसानों को सिंचाई का स्थायी साधन मिलेगा। इससे गंगाजल की बर्बादी भी रोकी जा सकेगी और साथ ही दक्षिण बिहार में गिरते भूजल स्तर (Water Level) में सुधार होगा। जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने बताया कि इस योजना के तहत मॉनसून के अतिरिक्त पानी का संचय किया जाएगा, जिससे जलाशयों का संकट लंबे समय तक स्थायी रूप से हल हो जाएगा।
नवादा, जमुई, लखीसराय और मुंगेर जैसे जिले लंबे समय से सूखे और पानी की किल्लत से जूझते रहे हैं। इस योजना के लागू होने से इन इलाकों के जलस्रोत मजबूत होंगे और पर्यावरणीय संतुलन यानी पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) को भी फायदा पहुंचेगा। पहले चरण के सफल रहने पर बाकी बचे जलाशयों को दूसरे चरण में शामिल करने की भी तैयारी की जा रही है।