रिश्वतखोरी में दोषी करार: गया के थाना प्रभारी लाल बाबू प्रसाद को 3 साल की सजा

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 तथा धारा 13(2) सह पठित धारा 13(1)(डी) के तहत आरोपी को तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 25-25 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जुर्माना नहीं देने पर एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

Amit Singh

पटना, 08 अप्रैल 2026: पटना स्थित निगरानी न्यायालय ने भ्रष्टाचार के एक पुराने मामले में गया जिले के अतरी थाना प्रभारी लाल बाबू प्रसाद को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। माननीय न्यायाधीश (निगरानी) मो. रूस्तम ने यह फैसला सुनाया।

अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 तथा धारा 13(2) सह पठित धारा 13(1)(डी) के तहत आरोपी को तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 25-25 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जुर्माना नहीं देने पर एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

क्या था मामला ?

यह मामला वर्ष 2006 का है, जिसमें गया जिले के अतरी थाना क्षेत्र के निवासी धनंजय सिंह ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन थाना प्रभारी लाल बाबू प्रसाद ने उन्हें, उनके भाई और चाचा को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी और मामले से बचाने के एवज में 8,000 रुपये की रिश्वत मांगी। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने कार्रवाई करते हुए 13 अक्टूबर 2006 को आरोपी को 6,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।

जांच और पैरवी में सफलता

मामले की जांच तत्कालीन पुलिस निरीक्षक रणवीर सिंह ने की और समय पर आरोप-पत्र दाखिल किया। बिहार सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक किशोर कुमार सिंह ने प्रभावी पैरवी करते हुए अदालत में आरोपी के खिलाफ दोष सिद्ध कराया।

2026 में अब तक 7 मामलों में सजा

निगरानी विभाग के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक भ्रष्टाचार के कुल 7 मामलों में अदालत द्वारा सजा सुनाई जा चुकी है। विभाग ने कहा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

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