NEWS PR डेस्क: केंद्र सरकार ने कहा है कि देश में बालिकाओं की सुरक्षा, संरक्षण और सशक्तिकरण सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा इस दिशा में एक व्यापक और बहुआयामी रणनीति पर काम किया जा रहा है। लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने बताया कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, आर्थिक भागीदारी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के जरिए बालिकाओं और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं।
‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ से सामाजिक बदलाव
मंत्री ने बताया कि Beti Bachao Beti Padhao योजना की शुरुआत 22 जनवरी 2015 को बाल लिंगानुपात (CSR) में सुधार और महिलाओं के जीवनचक्र से जुड़े मुद्दों को संबोधित करने के लिए की गई थी। यह पहल अब एक जनआंदोलन का रूप ले चुकी है, जिसमें सरकार, समुदाय, मीडिया और नागरिक समाज की सक्रिय भागीदारी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की गरिमा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए Swachh Bharat Mission के तहत 11.8 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया है। वहीं, Sukanya Samriddhi Yojana बालिकाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है।
शिक्षा से आत्मनिर्भरता की ओर
स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में Samagra Shiksha के माध्यम से प्री-स्कूल से कक्षा 12 तक समावेशी शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अलावा Kasturba Gandhi Balika Vidyalaya योजना के तहत वंचित वर्गों की बालिकाओं को आवासीय शिक्षा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। STEM क्षेत्रों में लड़कियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए Vigyan Jyoti कार्यक्रम संचालित है, जो कक्षा 9 से 12 तक की मेधावी छात्राओं को विज्ञान एवं तकनीक में करियर के लिए प्रेरित करता है।
कौशल और रोजगार पर जोर
महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता के लिए Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana के तहत कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। Deendayal Antyodaya Yojana – National Rural Livelihoods Mission और National Urban Livelihoods Mission के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए Stand-Up India, Pradhan Mantri MUDRA Yojana और Prime Minister’s Employment Generation Programme जैसी योजनाएं लागू हैं।
राजनीतिक प्रतिनिधित्व में बढ़ोतरी
सरकार ने संविधान के 73वें संशोधन के तहत पंचायती राज संस्थाओं में कम से कम 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की हैं। वर्तमान में 12 लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि कार्यरत हैं, जो कुल प्रतिनिधियों का लगभग 49.75% हैं। इसके अलावा Nari Shakti Vandan Adhiniyam के जरिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
सुरक्षा और कानूनी संरक्षण
महिलाओं की सुरक्षा के लिए Mission Shakti के तहत ‘संबल’ और ‘सामर्थ्य’ घटकों के माध्यम से वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन और अन्य सहायता सेवाएं संचालित की जा रही हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques Act (PC&PNDT) अधिनियम के तहत लिंग चयन पर रोक लगाई गई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्यों को वित्तीय और तकनीकी सहयोग दिया जा रहा है।
लिंगानुपात में सुधार
स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (HMIS) की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर जन्म के समय लिंगानुपात 2014-15 में 918 से बढ़कर 2024-25 में 929 हो गया है। इसे सरकार की नीतियों और जागरूकता अभियानों का सकारात्मक परिणाम माना जा रहा है।
सरकार का कहना है कि इन सभी पहलों का उद्देश्य बालिकाओं और महिलाओं के लिए सुरक्षित, समान और अवसरों से परिपूर्ण वातावरण सुनिश्चित करना है, ताकि वे देश के विकास में बराबरी से भागीदारी निभा सकें।