NEWS PR डेस्क: बिहार के आरा से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है। एक ऐसे परिवार की बेटी ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में सफलता हासिल की है, जिसके दादा कभी राज्य की सबसे चर्चित शख्सियतों में गिने जाते थे। आकांक्षा सिंह ने UPSC के फाइनल रिजल्ट में 301वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार और जिले का नाम रोशन किया है।
आकांक्षा आरा जिले के पवना थाना क्षेत्र के खोपिरा गांव की रहने वाली हैं। उनके दादा बरमेश्वर नाथ सिंह उर्फ ब्रह्मेश्वर मुखिया थे, जो कभी बिहार की राजनीति और सामाजिक संघर्षों में काफी चर्चित रहे। एक समय उनके सिर पर सरकार ने 5 लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया था।
दूसरे प्रयास में मिली सफलता
आकांक्षा सिंह ने दूसरे प्रयास में UPSC परीक्षा पास की। उनकी शुरुआती पढ़ाई आरा के कैथोलिक हाई स्कूल से हुई, जहां उन्होंने 2017 में मैट्रिक परीक्षा में करीब 80 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद 2019 में उन्होंने कैथोलिक मिशन स्कूल से इंटरमीडिएट की परीक्षा 81 प्रतिशत अंक के साथ पास की।
आगे की पढ़ाई उन्होंने वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय से संबद्ध हर प्रसाद दास जैन कॉलेज से अंग्रेजी ऑनर्स में की। साल 2022 से उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की। पहले प्रयास में वह प्रारंभिक परीक्षा पास नहीं कर पाईं, लेकिन दूसरे प्रयास में उन्होंने 301वीं रैंक हासिल कर सफलता का परचम लहरा दिया।
दादा का सपना किया पूरा
आकांक्षा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया है। उन्होंने बताया कि उनके दादा का सपना था कि परिवार में कोई UPSC की परीक्षा पास करे। आकांक्षा कहती हैं कि आज उनकी यह सफलता उनके दादा के सपने को पूरा करने जैसी है और उन्हें विश्वास था कि वह एक दिन यह मुकाम जरूर हासिल करेंगी।
विराट कोहली को मानती हैं आदर्श
आकांक्षा सिंह भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली को अपना आदर्श मानती हैं। उनका कहना है कि विराट कोहली का अपने काम के प्रति समर्पण और अनुशासन उन्हें प्रेरित करता है।
परिवार में जश्न का माहौल
आकांक्षा की सफलता के बाद उनके घर में खुशी का माहौल है। परिवार और गांव के लोग उन्हें मिठाई खिलाकर बधाई दे रहे हैं। आकांक्षा रोजाना करीब 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती थीं और अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और मार्गदर्शकों को देती हैं।
उनकी मां रिंकू सिंह ने भी इस सफलता में अहम भूमिका निभाई। बेटी को पढ़ाई के लिए पूरा समय मिल सके, इसके लिए उन्होंने घर की सारी जिम्मेदारियां खुद संभाल लीं।
संघर्षों से भरा रहा परिवार का इतिहास
आकांक्षा के परिवार का इतिहास संघर्षों से भरा रहा है। उनके दादा ब्रह्मेश्वर मुखिया ने 1994 में नक्सलवाद के खिलाफ रणवीर सेना का गठन किया था। इस संगठन और नक्सली संगठनों के बीच कई हिंसक घटनाएं भी हुईं।
ब्रह्मेश्वर मुखिया कई मामलों में आरोपी रहे और उन्हें करीब 9 साल जेल में भी बिताने पड़े। 2011 में जेल से रिहा होने के बाद 2012 में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
पढ़ाई को हमेशा दिया महत्व
बताया जाता है कि ब्रह्मेश्वर मुखिया खुद भी पढ़ाई में काफी तेज थे और उन्होंने मैट्रिक परीक्षा में गणित में 100 में 100 अंक हासिल किए थे। उनकी पोती आकांक्षा ने भी मैट्रिक में गणित में पूरे 100 अंक प्राप्त किए।
संघर्षों और विवादों से भरे परिवार से निकलकर UPSC जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल करने वाली आकांक्षा सिंह की कहानी आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।