NEWS PR डेस्क: दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू कोर्ट में आज बहुचर्चित ‘लैंड फॉर जॉब’ मामले की अहम सुनवाई होनी है। इस दौरान राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी व बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के अदालत में उपस्थित रहने की संभावना है। दोनों रविवार शाम दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं। इस प्रकरण में लालू परिवार के कई सदस्यों सहित कुल 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जा चुके हैं, जिसके बाद अब मामले की सुनवाई ट्रायल चरण में आगे बढ़ेगी।
परिवार के सदस्य भी आरोपी
इस केस में लालू प्रसाद यादव के साथ उनके बेटे तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव, बेटी व सांसद मीसा भारती तथा बेटी हेमा यादव को भी आरोपी बनाया गया है। अदालत ने कहा है कि प्रथम दृष्टया गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिनकी विस्तृत जांच ट्रायल के दौरान की जाएगी। अब तक 52 आरोपियों को बरी किया जा चुका है, जबकि शेष के खिलाफ मुकदमा चलेगा। अदालत के फैसले से राजनीतिक हलकों में भी हलचल बढ़ गई है।
अदालत की सख्त टिप्पणी
करीब 18 दिन पहले हुई सुनवाई में विशेष न्यायाधीश विशाल गोग्ने ने टिप्पणी की थी कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार सरकारी नौकरियों के बदले जमीन और संपत्ति हासिल करने की कथित साजिश में शामिल रहा। अदालत ने कहा कि रेल मंत्री रहते हुए सरकारी नौकरियों का उपयोग सौदेबाजी के माध्यम के रूप में किया गया और परिवार के नाम संपत्तियां अर्जित की गईं। न्यायालय के अनुसार मामला केवल अनियमित नियुक्तियों तक सीमित नहीं, बल्कि संगठित आपराधिक साजिश की ओर संकेत करता है।
CBI की जांच और अदालत की राय
मामले की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) कर रही है। अदालत ने CBI की चार्जशीट और प्रस्तुत दस्तावेजों का अवलोकन करते हुए कहा कि एजेंसी ने ऐसे पर्याप्त साक्ष्य दिए हैं, जिनसे गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिलते हैं और जिनकी विस्तृत जांच ट्रायल में आवश्यक है।
अदालत ने जमीन के हस्तांतरण, संपत्तियों के कथित तौर पर कम कीमत पर अधिग्रहण, परिवार और सहयोगियों के नाम खरीद-फरोख्त तथा वित्तीय लेन-देन की गहन जांच पर जोर दिया। हालांकि न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आरोप तय होना दोष सिद्धि नहीं है और सभी आरोपियों को ट्रायल के दौरान अपना पक्ष रखने तथा CBI के दावों को चुनौती देने का पूरा अवसर मिलेगा।
2004 से 2009 के बीच की कथित साजिश
CBI के मुताबिक, यह कथित साजिश 2004 से 2009 के बीच रची गई, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि इस अवधि में मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर सहित विभिन्न रेलवे जोनों में बिहार के लोगों को ग्रुप-डी पदों पर नियुक्त किया गया।
जांच एजेंसी का दावा है कि इन नियुक्तियों के बदले संबंधित व्यक्तियों या उनके परिजनों से जमीन ली गई, जिसे बाद में लालू परिवार के सदस्यों और एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी के नाम स्थानांतरित किया गया। बाद में इस कंपनी पर भी लालू परिवार के नियंत्रण का आरोप है।