NEWS PR डेस्क: पटना, 30 मार्च। बिहार की राजनीति में एक अहम बदलाव के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, वे मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे। उनके इस कदम के बाद राज्य की सियासत में नए समीकरणों और संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
दरअसल, हाल ही में नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। संवैधानिक प्रावधानों के तहत उन्हें एक निश्चित अवधि के भीतर किसी एक सदन की सदस्यता छोड़नी थी, जिसके तहत उन्होंने विधान परिषद की सीट से इस्तीफा दिया। अब उनका राज्यसभा सदस्य के रूप में औपचारिक प्रवेश लगभग तय माना जा रहा है।
नीतीश कुमार का विधान परिषद से लंबा जुड़ाव रहा है। वर्ष 2006 से वे लगातार परिषद के सदस्य रहे और मई 2024 में चौथी बार इस सदन के सदस्य बने थे। उनका कार्यकाल वर्ष 2030 तक था, लेकिन राज्यसभा में जाने के फैसले के बाद उन्होंने यह सीट छोड़ दी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह फैसला रणनीतिक भी माना जा रहा है। एक तरफ वे मुख्यमंत्री पद पर बने रहते हुए राज्य की राजनीति पर पकड़ बनाए रखेंगे, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय राजनीति में भी उनकी सक्रिय भूमिका बढ़ सकती है।
गौरतलब है कि नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर लंबे अनुभवों से भरा रहा है। वे 1985 में पहली बार विधायक बने थे और 1989 में लोकसभा पहुंचे थे। अब वे पहली बार राज्यसभा के सदस्य बनने जा रहे हैं।