जूठे बर्तन मांजकर 2,500 रुपये कमाने वाली कलिता माजी, TMC को हराकर बनीं विधायक; संघर्ष से जीत की कहानी

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: पश्चिम बंगाल की ऑसग्राम विधानसभा सीट से आई एक खबर ने लोकतंत्र की ताकत को फिर साबित कर दिया है। कभी दूसरों के घरों में बर्तन और फर्श साफ करने वाली कलिता माजी आज जनता की प्रतिनिधि बनकर विधानसभा पहुंच गई हैं। उनकी यह जीत किसी प्रेरणादायक कहानी से कम नहीं मानी जा रही।

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरीं कलिता माजी ने तृणमूल कांग्रेस के श्यामा प्रसन्ना लाहौर को 12,535 वोटों के बड़े अंतर से हराया। उन्हें कुल 1,07,692 मत प्राप्त हुए। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने घर-घर जाकर प्रचार किया और जनता से सीधा संवाद स्थापित किया, जिसका परिणाम उनकी ऐतिहासिक जीत के रूप में सामने आया।

राजनीति में आने से पहले कलिता माजी पिछले करीब 20 वर्षों से घरेलू कामगार के रूप में कार्य कर रही थीं। वह कई घरों में साफ-सफाई और बर्तन धोने का काम करती थीं और हर महीने लगभग 2,500 रुपये कमाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं।

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यह पहली बार नहीं था जब उन्होंने चुनावी मैदान में कदम रखा। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया था, जहां उन्हें करीब 41 प्रतिशत वोट मिले थे, लेकिन वह लगभग 12,000 मतों से हार गई थीं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार जमीनी स्तर पर सक्रिय रहीं।

उनकी यह जीत न केवल व्यक्तिगत संघर्ष की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि लोकतंत्र में आम नागरिक भी अपनी मेहनत और लगन से बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है।

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