किसानों के हित में मोदी सरकार का बड़ा कदम, उर्वरक उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस आपूर्ति को मिली प्राथमिकता

Amit Singh

NEWS PR डेस्क: नई दिल्ली। किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने और खरीफ सीजन की बुवाई प्रभावित न होने देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026 जारी करते हुए उर्वरक क्षेत्र को प्राकृतिक गैस आपूर्ति की प्राथमिकता सूची में शामिल कर दिया है।

इस निर्णय के तहत उर्वरक संयंत्रों को उनकी पिछली छह महीनों की औसत गैस खपत का कम से कम 70 प्रतिशत प्राकृतिक गैस उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि उत्पादन बाधित न हो। हालांकि यह गैस केवल उर्वरक उत्पादन के लिए ही इस्तेमाल की जा सकेगी।

सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण एलएनजी (LNG) आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। सरकार का कहना है कि वैश्विक गैस संकट के बावजूद देश में उर्वरक उत्पादन पर इसका असर नहीं पड़ने दिया जाएगा।

खरीफ सीजन से पहले उर्वरक का मजबूत भंडार

उर्वरक विभाग के अनुसार, अग्रिम भंडारण की रणनीति के चलते देश में उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। 10 मार्च 2026 तक देश में कुल 180.12 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का भंडार उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 131.79 लाख मीट्रिक टन था। यानी इस बार उर्वरक स्टॉक में लगभग 36.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

मुख्य उर्वरकों के भंडार की स्थिति भी मजबूत बताई गई है।

यूरिया: 61.51 लाख मीट्रिक टन

डीएपी: 25.17 लाख मीट्रिक टन

एनपीके: 56.30 लाख मीट्रिक टन

एमओपी: 12.90 लाख मीट्रिक टन

एसएसपी: 24.24 लाख मीट्रिक टन

विशेष रूप से डीएपी और एनपीके जैसे प्रमुख मृदा पोषक तत्वों के भंडार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

उर्वरक कंपनियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक

इस संबंध में उर्वरक विभाग में मंगलवार को एक उच्चस्तरीय बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें सभी प्रमुख उर्वरक कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में कंपनियों ने अपनी तैयारियों और चुनौतियों की जानकारी दी। विभाग की ओर से आश्वस्त किया गया कि उर्वरक संयंत्रों को निरंतर संचालित रखने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। बैठक में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकारी भी मौजूद रहे।

आयात के जरिए भी बढ़ाई जा रही उपलब्धता

सरकार ने उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आयात का भी प्रबंध किया है। फरवरी 2026 तक भारत ने 98 लाख मीट्रिक टन यूरिया का आयात किया है, जबकि अगले तीन महीनों के लिए 17 लाख मीट्रिक टन से अधिक यूरिया का अतिरिक्त आयात प्रक्रिया में है।

सरकार का कहना है कि मजबूत भंडार और समय पर आयात के चलते वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी तरह की बाधा का असर देश के किसानों पर नहीं पड़ेगा और खरीफ बुवाई के दौरान उर्वरकों की कमी नहीं होगी।

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