NEWS PR डेस्क : बिहार में वाहन जांच को लेकर पुलिस मुख्यालय ने नई व्यवस्था लागू की है। नए निर्देशों के तहत अब सड़क पर वाहनों की जांच का अधिकार केवल सब-इंस्पेक्टर (SI) या उससे ऊपर के अधिकारियों को होगा। सिपाही, हवलदार और एएसआई (ASI) स्तर के पुलिसकर्मी अब वाहन चालकों को रोककर गाड़ी की जांच या ऑन-द-स्पॉट कार्रवाई नहीं कर सकेंगे।

पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी निर्देश के अनुसार, दारोगा (SI) से नीचे के पुलिसकर्मियों की प्राथमिक जिम्मेदारी अब ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना और सड़कों को जाम से मुक्त कराना होगी। उन्हें किसी भी परिस्थिति में वाहन चालकों को रोककर दस्तावेजों की जांच करने की अनुमति नहीं होगी।
बॉडी-वॉर्न कैमरा रखना होगा चालू
नई व्यवस्था के तहत ट्रैफिक ड्यूटी या वाहन जांच में तैनात सभी पुलिसकर्मियों के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरा (Body-Worn Camera) चालू रखना अनिवार्य किया गया है। यदि कैमरा बंद पाया जाता है और उस दौरान किसी वाहन चालक या राहगीर के साथ विवाद की स्थिति उत्पन्न होती है, तो संबंधित पुलिसकर्मी को जिम्मेदार माना जाएगा।
नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई
पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि आदेश के अनुपालन की निगरानी के लिए विशेष जांच दल गठित किए जाएंगे। यदि कोई सिपाही या एएसआई नए निर्देशों का उल्लंघन करते हुए वाहन जांच करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
क्या बदलेगा?
अब तक बिहार में सिपाही, हवलदार और एएसआई भी वाहनों को रोककर दस्तावेजों की जांच और कई मामलों में ऑन-द-स्पॉट चालान की प्रक्रिया में शामिल होते थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद वाहन जांच और संबंधित कार्रवाई का अधिकार केवल दारोगा (SI) या उससे वरिष्ठ अधिकारियों के पास रहेगा, जबकि अन्य पुलिसकर्मी ट्रैफिक नियंत्रण और जाम प्रबंधन पर ध्यान देंगे। पुलिस मुख्यालय का मानना है कि नई व्यवस्था से वाहन जांच प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता आएगी, जवाबदेही बढ़ेगी और आम लोगों तथा पुलिस के बीच अनावश्यक विवाद की संभावना भी कम होगी
