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JRD Tata की पुण्यतिथि पर जदयू ट्रेडर प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष सह प्रवक्ता संजीव श्रीवास्तव ने दी विनम्र श्रद्धांजलि, जानिए जमशेदजी टाटा की कहानी

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NEWSPR डेस्क। जहांगीर रतनजी दादाभोई टाटा या जेआरडी टाटा देश को पहली एयरलाइंस देने वाले बिजनेसमैन थे। जेआरडी टाटा पायलट का सर्टिफिकेट पाने वाले पहले भारतीय थे। उन्हें हवा में उड़ने का शौक था। देश की सरकारी एयरलाइंस एयर इंडिया फिर से टाटा ग्रुप के पास लौट आई है। भारत रत्न से सम्मानित जेआरडी टाटा की सोमवार को पुण्यतिथि है। जेआरडी टाटा के शब्दों में ही उनके जीवन के फलसफे के बारे में जानते हैं।

टाटा परिवार का क्या मतलब?
जेआरडी टाटा ने कहा कि अगर वे आरडी टाटा के बेटे नहीं होते या देश के किसी खास व्यक्ति के घर में पैदा नहीं हुए होते तो उन्हें इतना मोटिवेशन कहीं से भी नहीं मिल पाता। जेआरडी टाटा को इस बात से प्रेरणा मिली कि उनकी जिंदगी में जमशेदजी टाटा थे। यही वजह है कि उन्हें खुद पर भरोसा रखने और कुछ करने का हौसला मिला। शुरुआत में जेआरडी टाटा को पूर्वजों के नक्शे कदम पर चल पाने की अपनी क्षमता पर थोड़ा संदेह था। वह अपने पिता का शुक्रिया अदा करते हैं। इसके साथ ही दोराबजी टाटा और जमशेदजी टाटा की तो बहुत ज्यादा सराहना करते हैं। वह इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि टाटा होने का क्या मतलब है।

ब्रिटिश शासन का विरोध
जेआरडी टाटा ब्रिटिश विरोधी भारतीय थे और एक फ्रांसीसी से थोड़े अधिक भारतीय थे। एक भारतीय की तुलना में वे अधिक फ्रांसीसी इसलिए थे क्योंकि फ्रेंच उनकी भाषा थी। जेआरडी टाटा ब्रिटिश शासन के खिलाफ थे और यह सोचते थे कि अगर वे फ्रांसीसी सेना में होते तो उन्हें औपनिवेशिक विद्रोह को कुचलने के लिए इस्तेमाल किया जाता।

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फ़्लाइंग मशीन का भविष्य
फ्लाइंग मशीनों का साफ तौर पर युद्ध के समय के अलावा उस समय कोई और भविष्य नहीं था। उनके पायलट उपद्रवी थे, जहाज भी बहुत शोर मचाते थे, वह भीड़ जमा कर लेते थे। कभी-कभी हवाई जहाज और उनके पायलट को दूर ले जाना पड़ता था। हवाई क्लब में कुछ क्रेजी लोगों को छोड़कर स्पोर्ट्स और तमाशे के अलावा उस समय नागरिक उड्डयन का कोई भविष्य नहीं समझता था। आधिकारिक तौर पर मूछों वाले पुलिसकर्मी का दखल केवल तब दिखता जब इस तरह की शिकायत आती कि किसी किसान का खेत हवाई जहाज की वजह से उजड़ गया या किसी गाय को चोट लग गई।

फ़्लाइंग लाइसेंस पाने की ख़ुशी
जेआरडी टाटा के मुताबिक उन्हें किसी दस्तावेज को पाकर इतनी खुशी नहीं हुई जितनी फेडरेशन एयरोनॉटिक इंटरनेशनल की ओर से एयरो क्लब इंडिया ऑफ इंडिया और म्यांमार द्वारा जारी छोटे से नीले नीले और सुनहरे सर्टिफिकेट की वजह से मिली। सच यह है कि यह सिर्फ एक नंबर था जिसे टाटा ने गर्व के साथ अपने लिए जोड़ लिया। भारत में फ्लाइंग लाइसेंस पाने वाले टाटा पहले शख्स थे, जबकि दुनिया के बाकी हिस्सों में उस समय फ्लाइंग गंभीर बिजनेस बन चुका था।

हनीमून पर कंचनजंगा
जेआरडी टाटा ने शादी होने के बाद हनीमून मनाने के लिए कंचनजंगा की चोटियों को करीब से देखने का फैसला किया। दिसंबर की सर्दियों में वे दार्जिलिंग चले गए। उन्हें यह महसूस नहीं हुआ कि वहां कितनी ठंड हो सकती है। दार्जिलिंग के सभी टूरिस्ट सुबह 4:00 बजे टाइगर हिल पर सूर्योदय देखने के लिए जाते हैं। इसकी जगह टाटा घोड़े पर सवार होकर टोंगल और संदकफू के 2 दिन के सफर पर निकल गए। वहां इतनी ठंड थी कि उन्हें चूल्हे में लकड़ी जलाते हुए रात बितानी पड़ी। उन्होंने अपने कपड़ों के अंदर अखबार की तह भर ली ताकि खुद को गर्म रख सकें।

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