NEWS PR डेस्क: बिहार की राजधानी पटना में अप्रैल महीने से वाटर मेट्रो सेवा शुरू होने जा रही है। इसके साथ ही पटना, कोच्चि के बाद देश का दूसरा शहर बन जाएगा, जहां वाटर मेट्रो का संचालन होगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जिम्मेदारी राज्य के पर्यटन विभाग को सौंपी गई है। खास बात यह है कि यह पूरी तरह इलेक्ट्रिक होगी और पर्यावरण के लिहाज से अनुकूल मानी जा रही है।
वाटर मेट्रो के संचालन से राज्य में प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी, साथ ही जल परिवहन और नदी पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना भविष्य में सोनपुर और वैशाली जैसे जिलों को भी नदी मार्ग से जोड़ने की योजना पर आधारित है। बिहार में गंगा नदी 12 जिलों से होकर गुजरती है, जबकि गंडक 7 और बूढ़ी गंडक 5 जिलों से गुजरती है। ऐसे में नदी मार्ग से कनेक्टिविटी बढ़ने से यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई के लिए भी बेहतर विकल्प उपलब्ध होगा।
वाटर मेट्रो का संचालन दीघा से कंगनघाट के बीच किया जाएगा। इस रूट पर गांधी घाट और गाय घाट पर भी स्टॉपेज होंगे। इसके लिए दीघा, गांधी घाट और कंगनघाट पर चार्जिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं, जिसके लिए टेंडर भी जारी कर दिया गया है।
वाटर मेट्रो का न्यूनतम किराया 50 रुपये और अधिकतम किराया 100 रुपये तय किया गया है। यात्री बिहार टूरिज्म की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए टिकट बुक कर सकेंगे। इसके अलावा जल्द ही एक मोबाइल एप भी लॉन्च किए जाने की तैयारी है। सेवा सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक उपलब्ध रहेगी। भविष्य में इसे सोनपुर तक विस्तारित करने की भी संभावना जताई जा रही है।
प्रत्येक वाटर मेट्रो बोट में लगभग 100 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। इस परियोजना की कुल लागत करीब 908 करोड़ रुपये बताई जा रही है, जबकि एक बोट की कीमत लगभग 12 करोड़ रुपये है। आपको बता दें कि यह परियोजना को कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड के सहयोग से विकसित किया जा रहा है।