पिता को दी मुखाग्नि, फिर दिया UPSC इंटरव्यू… बिना कोचिंग बिहार की बेटी जूही ने रच दी मिसाल

Asha Rai

NEWS PR डेस्क: पिता का साया सिर से उठ जाना किसी भी बेटी के लिए सबसे बड़ा दुख होता है। बिहार के किशनगंज की रहने वाली जूही दास के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। जूही दास की कहानी हौसले और संघर्ष की मिसाल बन गई है। पिता के अचानक निधन के गहरे सदमे के बावजूद उन्होंने देश की प्रतिष्ठित परीक्षा Union Public Service Commission (UPSC ) में सफलता हासिल कर अपने परिवार और जिले का नाम रोशन किया है। जूही दास ने सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 649वीं रैंक प्राप्त की है।

पिता के निधन के बाद भी नहीं छोड़ा हौसला

13 फरवरी को जूही के पिता निवारण दास का अचानक निधन हो गया था। इस घटना से पूरा परिवार सदमे में था और जूही भी मानसिक रूप से काफी टूट चुकी थीं।

इसी बीच उन्हें यूपीएससी इंटरव्यू के लिए बुलावा मिला, जो 24 फरवरी को दिल्ली में निर्धारित था। ऐसे मुश्किल समय में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि वह शोक के बीच इंटरव्यू देने जाएं या नहीं।

परिवार के सदस्यों और खासतौर पर उनकी मां ने उन्हें हिम्मत दी और भविष्य के बारे में सोचते हुए इंटरव्यू में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। भारी मन के साथ जूही दिल्ली पहुंचीं और पूरे साहस के साथ इंटरव्यू दिया।

श्राद्ध के दिन दिया इंटरव्यू

इस कहानी का सबसे भावुक पहलू यह रहा कि जिस दिन जूही दिल्ली में UPSC का इंटरव्यू दे रही थीं, उसी दिन किशनगंज स्थित उनके घर पर उनके पिता का श्राद्ध कर्म चल रहा था। दिल में पिता को खोने का दर्द लिए जूही ने इंटरव्यू दिया और उन्हें भरोसा था कि उनके पिता का आशीर्वाद उनके साथ है। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और परिणाम घोषित होने पर उन्होंने परीक्षा में सफलता हासिल कर अपने पिता के सपने को पूरा कर दिया।

मां के अधूरे सपने को भी किया पूरा

जूही के पिता निवारण दास एक व्यवसायी थे और अपने मिलनसार स्वभाव के कारण समाज में काफी लोकप्रिय थे। उनकी सफलता के बाद लोग न केवल जूही को बधाई दे रहे हैं बल्कि उनके दिवंगत पिता को भी याद कर भावुक हो रहे हैं।

जूही की इस उपलब्धि के साथ उनकी मां अनिका दास का करीब 30 साल पुराना सपना भी पूरा हो गया। दरअसल, अनिका दास ने वर्ष 1996 में यूपीएससी परीक्षा दी थी, लेकिन उस समय उन्हें सफलता नहीं मिल सकी थी। इसके बाद उन्होंने अधिवक्ता के रूप में अपने करियर को आगे बढ़ाया, लेकिन यूपीएससी का सपना हमेशा जिंदा रखा और अपनी बेटी को इसके लिए प्रेरित करती रहीं।

कड़ी मेहनत से मिली कामयाबी

जूही दास की सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत और अनुशासन का बड़ा योगदान रहा। वह रोजाना करीब 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती थीं। परिवार में शिक्षा का माहौल होने के कारण उनकी पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया गया।

जूही की इस उपलब्धि से न केवल उनका परिवार बल्कि पूरा किशनगंज जिला गर्व महसूस कर रहा है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद जिस तरह उन्होंने धैर्य और संकल्प के साथ अपने लक्ष्य को हासिल किया, वह युवाओं के लिए प्रेरणा की मिसाल बन गई है।

Share This Article