NEWS PR डेस्क: पटना, 11 मार्च। मानव तस्करी, अनैतिक देह व्यापार और बाल श्रम से जुड़े मामलों के निपटारे में पुलिसकर्मियों को संवेदनशीलता के साथ काम करने की आवश्यकता है। यह बातें बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार ने पुलिस मुख्यालय सरदार पटेल भवन के सभागार में आयोजित एक कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही।
कमजोर वर्ग प्रभाग की मानव व्यापार निरोध इकाई की ओर से आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य पुलिसकर्मियों को मानव तस्करी और बच्चों की गुमशुदगी से जुड़े मामलों की गंभीरता के प्रति जागरूक करना था। कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए डीजीपी ने कहा कि यदि कोई बच्चा गुम हो जाता है और तीन महीने तक उसका पता नहीं चलता, तो मामला बेहद जटिल हो जाता है। ऐसे मामलों में पुलिसकर्मियों को संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी गुमशुदगी के मामलों को ऐसे समझें जैसे उनका अपना बच्चा गायब हो गया हो। उसी भावना के साथ खोए हुए बच्चों की तलाश कम से कम समय में करने का प्रयास किया जाना चाहिए। डीजीपी ने बताया कि वर्ष 2025 में मानव तस्करी, अनैतिक देह व्यापार और बाल श्रम से जुड़े कुल 506 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 1487 पीड़ितों को शोषण से मुक्त कराया गया और 437 मानव तस्करों को गिरफ्तार किया गया।
डीजीपी ने बताया कि राज्य के सभी जिलों में जिलास्तरीय मानव व्यापार निरोध इकाई (डीएल-एएचटीयू) का गठन किया गया है। पुलिस और रेलवे जिलों सहित कुल 44 जिलों के अलावा पटना, गया और दरभंगा हवाई अड्डों पर भी मानव तस्करी निरोध इकाइयां कार्यरत हैं, जबकि पूर्णिया हवाई अड्डे पर इसके गठन की प्रक्रिया चल रही है।
उन्होंने कहा कि मानव तस्करी से जुड़े मामलों के प्रभावी निपटारे के लिए दो मानक कार्य प्रणाली (एसओपी) तैयार की गई हैं। साथ ही गुमशुदा बच्चों के मामलों के समाधान के लिए विस्तृत मार्गदर्शिका भी जारी की गई है। पुलिस अधिकारियों को इन दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए मामलों के त्वरित निपटारे का प्रयास करना चाहिए।
डीजीपी ने कहा कि गुमशुदगी के मामलों में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। जितनी जल्दी कार्रवाई की जाएगी, मामले के खुलासे की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है। उन्होंने मानव तस्करी और अनैतिक देह व्यापार के उन्मूलन के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की भी आवश्यकता बताई।
इस अवसर पर डीजीपी ने घोषणा की कि मानव तस्करी के खिलाफ 1 से 20 अप्रैल तक “ऑपरेशन नया सवेरा 2.0” चलाया जाएगा।
कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में एनडीआरएफ के सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक डॉ. पी. एम. नायर ने मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। इस मौके पर एडीजी (कमजोर वर्ग) डॉ. अमित कुमार जैन सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद थे।