NEWS PR डेस्क: आज (29 जनवरी) मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समृद्धि यात्रा के दूसरे चरण में समस्तीपुर पहुंचे। इस दौरान समृद्धि यात्रा के सियासी मंच से उन्होंने जिले के लिए विकास का व्यापक खाका पेश किया, जिससे बिहार की राजनीति में नई हलचल देखने को मिली। गुरुवार को सरायरंजन प्रखंड के नरघोघी स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज मैदान से मुख्यमंत्री ने कुल 827 करोड़ रुपये की 188 विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया और यह संदेश दिया कि सरकार की प्राथमिकता ज़मीन पर दिखने वाला विकास है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का एजेंडा पूरी तरह स्पष्ट है—विकास, सुशासन और समावेशी तरक्की। इस मौके पर 471 करोड़ रुपये की लागत वाली 71 योजनाओं का शिलान्यास किया गया, जबकि अधिकारियों के आवास निर्माण समेत अन्य परियोजनाओं पर 20.45 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इन घोषणाओं को आने वाले चुनावी माहौल से पहले सत्ताधारी गठबंधन की मजबूत रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
नीतीश कुमार ने प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए कई अहम परियोजनाओं का ऐलान किया। इसके तहत 10 प्रखंडों में प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय, तीन प्रखंडों में आवासीय परिसरों के साथ कार्यालय, 40 पंचायत सरकार भवन, पुलिस केंद्र में 200 महिला सिपाही बैरक तथा पूसा, बंगरा और चकमहेसी में महिला सिपाही बैरक निर्माण का शिलान्यास किया गया।
ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत 84 करोड़ रुपये की 43 योजनाओं का कार्यारंभ भी किया गया, जिनमें 42 ग्रामीण सड़कें और एक पुल शामिल हैं। हरपुर सिंघिया से नत्थूद्वार और बुजुर्गद्वार तक सड़कों के निर्माण को ग्रामीण क्षेत्रों से सीधे जुड़ाव के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, करेह नदी के माहेघाट पर उच्चस्तरीय आरसीसी पुल के शिलान्यास से क्षेत्रीय संपर्क को नई गति मिलने की उम्मीद है।
समस्तीपुर पहुंचने पर मुख्यमंत्री ने दरभंगा को जोड़ने वाले निर्माणाधीन पुल का निरीक्षण किया और अधिकारियों को काम में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के सख्त निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर लगे विभिन्न विभागों के विकास स्टॉलों का भी निरीक्षण कर योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार चौधरी की मौजूदगी ने राजनीतिक तौर पर आयोजन को और मजबूती दी।
कुल मिलाकर, समस्तीपुर से दिया गया यह विकास का संदेश साफ संकेत देता है कि बिहार की राजनीति में अब जोर नारों से ज्यादा ठोस काम और करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं पर है।